धर्म-अध्यात्म

संपूर्ण तीर्थों के दर्शन और पूजन का फल,ऐसे करने से मिलेगा लाभ,जानें

Deepa Sahu
14 Jan 2021 8:24 PM IST
संपूर्ण तीर्थों के दर्शन और पूजन का फल,ऐसे करने से मिलेगा लाभ,जानें
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ऐसे चुटकी में पा सकते हैं पूरा लाभ

जनता से रिश्ता वेबडेस्क: ऐसे चुटकी में पा सकते हैं पूरा लाभ-हिंदू धर्म में तीर्थों के दर्शन को बेहद महत्‍वपूर्ण माना गया है। मगर अक्‍सर ऐसा होता है कि हम अपनी रोजाना की व्‍यस्‍त दिनचर्या और कार्यों में इतने फंसे रहते हैं कि हमें तीर्थों के दर्शन का लाभ नहीं मिल पाता है और न ही हम दर्शन के लिए वक्‍त निकाल पाते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं संपूर्ण तीर्थों के दर्शन का लाभ प्राप्‍त करने का अनोखा तरीका।

हथेली में ही समाया है संपूर्ण तीर्थ

भविष्‍य पुराण में बताया गया है कि मनुष्‍य के दाएं हाथ में ऐसी 5 जगह होती हैं जो बेहद खास मानी जाती हैं। इन 5 स्‍थानों को हमारे धार्मिक ग्रंथों में 5 तीर्थ माना गया है। हमें रोजाना सुबह उठकर अपनी दोनों हथेलियों के दर्शन करने चाहिए और इन्‍हें मस्‍तक से लगाकर इन पांचों तीर्थों का दर्शन करना चाहिए। जब हम दाएं हाथ से देवताओं, पितरों और ऋषियों को जल चढ़ाते हैं तो उस वक्‍त इस क्रिया में पांचों तीर्थों का समायोजन हो जाता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि हम सभी के हाथों में कौन से होते हैं ये पंचतीर्थ…
देवतीर्थ
आपकी हथेली में इस तीर्थ का स्‍थान उंगलियों के सबसे ऊपरी हिस्‍से में होता है। इस तीर्थ से ही देवताओं को जल अर्पित करने का कार्य किया जाता है और हमें सदैव पुण्‍य की प्राप्ति होती है।
पितृतीर्थ
हम सभी की हथेली में तर्जनी उंगली और अंगूठे के बीच के स्‍थान को पितृतीर्थ कहा जाता है। इससे श्राद्ध के वक्‍त हम सभी अपने पितरों को जल अर्पित करते हैं। रोजाना सुबह उठकर हथेली के इस भाग को स्‍पर्श करने से पितरों का स्‍मरण हो जाता है और आपके पितर दोष में राहत मिलती है।
ब्रह्मतीर्थ
हम सभी की हथेली के निचले हिस्‍से में यानी मणिबंध में ब्रह्मतीर्थ का स्‍थान होता है। इस तीर्थ से हम सभी लोग पूजापाठ से जुड़े धार्मिक कार्यों में आचमन करते हैं। इस स्‍थान से जल ग्रहण करने से शरीर की शुद्धि होती है।
सौम्‍यतीर्थ
हम सभी की हथेली में सौम्‍यतीर्थ का स्‍थान हथेली के एकदम बीचोंबीच में होता है। हथेली के इस स्‍थान से हम भगवान का प्रसाद ग्रहण करते हैं और चरणामृत पीते हैं। ध्‍यान रखें कि हम सभी को प्रसाद हमेशा सीधे हाथ से यानी दाएं हाथ से ग्रहण करना चाहिए।
ऋषितीर्थ
हम सभी के हाथ में कनिष्‍ठा उंगली के नीचे वाला स्‍थान ऋषितीर्थ कहलाता है। मान्‍यता है कि विवाह के वक्‍त जब सात फेरे लिए जाते हैं तो इसी उंगली से हस्तमिलाप इसी स्थान से किया जाता है। इस स्‍थान को जीवनसाथी के लिए शुभ माना जाता है।


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