धर्म-अध्यात्म

सूर्य चंद्रमा के मिलन से मिलेगा शुभ फल भाद्रपद अमावस्या का खास महत्व

nidhi
9 Sept 2026 8:16 AM IST
सूर्य चंद्रमा के मिलन से मिलेगा शुभ फल भाद्रपद अमावस्या का खास महत्व
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भाद्रपद अमावस्या
नई दिल्ली: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। भाद्रपद मास की अमावस्या को धार्मिक दृष्टि से बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य और चंद्रमा का विशेष संयोग बनता है, जिससे पूजा-पाठ, दान और पितरों के तर्पण का महत्व बढ़ जाता है।
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद अमावस्या पर किए गए धार्मिक कार्यों से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और ग्रहों के अशुभ प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है। इस दिन भगवान सूर्य, चंद्रमा और पितरों की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है।
सूर्य-चंद्रमा के मिलन का महत्व
अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में स्थित होते हैं। ज्योतिष में इसे सूर्य और चंद्रमा का मिलन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह समय आत्मशुद्धि, नई शुरुआत और आध्यात्मिक साधना के लिए शुभ होता है।
इस दिन श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान, पूजा-अर्चना और दान-पुण्य करते हैं। माना जाता है कि इससे मन को शांति मिलती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
पितरों की शांति के लिए खास दिन
भाद्रपद अमावस्या को पितरों को याद करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। लोग इस दिन तर्पण, श्राद्ध और जरूरतमंदों को दान करते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि पितरों की कृपा से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और जीवन में आने वाली परेशानियां कम होती हैं।
ग्रहों के अशुभ प्रभाव होंगे दूर
ज्योतिष के अनुसार, अमावस्या के दिन किए गए उपाय कुंडली में मौजूद नकारात्मक प्रभावों को शांत करने में सहायक माने जाते हैं। इस दिन सूर्य को जल अर्पित करना, मंत्र जाप करना और जरूरतमंदों की मदद करना शुभ माना जाता है।
हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इनका पालन व्यक्तिगत आस्था पर आधारित होता है।
क्या करें भाद्रपद अमावस्या पर
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सूर्य देव को जल अर्पित करें।
पितरों के लिए तर्पण और प्रार्थना करें।
जरूरतमंद लोगों को भोजन और वस्त्र का दान करें।
भगवान विष्णु और शिव की पूजा करें।
मन को शांत रखने के लिए ध्यान और मंत्र जाप करें।
जीवन में सकारात्मक बदलाव की मान्यता
भाद्रपद अमावस्या को आत्मचिंतन और अच्छे कार्यों की शुरुआत का दिन भी माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्यों से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
श्रद्धालु इस विशेष दिन को आस्था, पूजा और सेवा भाव के साथ मनाते हैं।
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