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इस मंदिर का चौंकाने वाला रहस्य, महीनों बंद हो जाती है राह

Religion धर्म : गुजरात में स्थित स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर अपने अनोखे प्राकृतिक दृश्य और धार्मिक मान्यताओं के कारण देशभर में चर्चा का विषय बना रहता है। यह मंदिर भरूच जिले के पास अरब सागर और खंभात की खाड़ी के तट पर समुद्र किनारे स्थित है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां होने वाली एक विशेष प्राकृतिक घटना इसे और भी रहस्यमयी बना देती है।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के अनुसार, इस मंदिर तक पहुंचने वाला रास्ता दिन में कुछ समय के लिए पूरी तरह समुद्र के पानी में डूब जाता है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है जैसे सड़क और मंदिर दोनों गायब हो गए हों। यह दृश्य पहली बार देखने वाले लोगों को काफी हैरान कर देता है।
इस अनोखी घटना का कारण समुद्र में आने वाले ज्वार (हाई टाइड) और भाटा (लो टाइड) को माना जाता है। ज्वार के समय समुद्र का पानी तेजी से बढ़कर मंदिर और उसके रास्ते को पूरी तरह ढक लेता है। इस दौरान मंदिर समुद्र की लहरों के बीच छिप जाता है। वहीं कुछ घंटों बाद जब भाटा आता है, तो पानी पीछे हट जाता है और मंदिर फिर से साफ दिखाई देने लगता है।
इसी वजह से स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर को “गायब होने वाला मंदिर” भी कहा जाता है। श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आने से पहले ज्वार-भाटा के समय की जानकारी जरूर लेते हैं, ताकि सही समय पर मंदिर तक पहुंच सकें। गलत समय पर पहुंचने पर उन्हें पानी के उतरने का इंतजार करना पड़ता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग को अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी माना जाता है। कहा जाता है कि इसका उल्लेख पौराणिक ग्रंथों में भी मिलता है। भक्तों का विश्वास है कि यहां दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। दूर-दूर से लोग इस अद्भुत दृश्य को देखने और भगवान शिव के दर्शन करने पहुंचते हैं। समुद्र की लहरों के बीच गायब और फिर प्रकट होने वाला यह मंदिर आस्था और प्रकृति का अनोखा संगम माना जाता है।
स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह प्राकृतिक घटनाओं का एक जीवंत उदाहरण भी है, जो इसे भारत के सबसे रहस्यमयी और आकर्षक धार्मिक स्थलों में शामिल करता है।





