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धर्म-अध्यात्म
मां दुर्गा के 9 स्वरूप और उनका आशीर्वाद, जानें हर दिन का महत्व
Tara Tandi
2 Oct 2026 6:57 PM IST

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Shardiya Navratri ज्योतिष न्यूज़ : हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि को देवी आराधना का विशेष पर्व माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि देवी के प्रत्येक रूप की अपनी अलग महिमा और विशेषता है। नवरात्रि के दौरान भक्त उपवास रखते हैं और विधि-विधान से मां की आराधना करते हैं। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्तूबर 2026 से होगी। प्रतिपदा से लेकर नवमी तक हर दिन मां के एक स्वरूप को समर्पित रहेगा। आइए जानते हैं नवरात्रि के नौ दिनों में किस दिन किस देवी की पूजा की जाएगी और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उनकी आराधना से क्या फल प्राप्त होता है।
शारदीय नवरात्रि कब से शुरू होगी?
हिंदू पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि का आरंभ आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस वर्ष प्रतिपदा तिथि 10 अक्तूबर 2026 की रात 9:19 बजे से शुरू होगी और 11 अक्तूबर की रात 9:30 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्तूबर 2026, रविवार को रहेगा। इसी दिन घटस्थापना के साथ नवरात्रि की शुरुआत होगी।
नवरात्रि के 9 दिनों में किस देवी की पूजा होगी?
पहला दिन: मां शैलपुत्री
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है। उन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां शैलपुत्री की आराधना से भक्तों को शक्ति, स्थिरता और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।
दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी
दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना होती है। देवी का यह स्वरूप तप, संयम और धैर्य से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति में धैर्य व आत्मबल बढ़ता है।
तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। देवी के मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में उनकी आराधना को साहस, शक्ति और नकारात्मकता से रक्षा से जोड़ा गया है।
चौथा दिन: मां कूष्मांडा
चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है। मान्यता है कि देवी का यह स्वरूप सृष्टि की ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक है। उनकी उपासना से घर में सुख-समृद्धि, प्रसन्नता और सकारात्मक वातावरण बना रहने की कामना की जाती है।
पांचवां दिन: मां स्कंदमाता
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां की गोद में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार उनकी आराधना से बुद्धि, शांति और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है। संतान की मंगलकामना के लिए भी देवी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
छठा दिन: मां कात्यायनी
छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना की जाती है। देवी कात्यायनी को शक्ति और साहस का स्वरूप माना गया है। धार्मिक मान्यताओं में उनकी पूजा को वैवाहिक सुख और मनोकामना पूर्ति से जोड़ा जाता है।
सातवां दिन: मां कालरात्रि
सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा होती है। देवी का यह स्वरूप नकारात्मक शक्तियों और भय से रक्षा करने वाला माना जाता है। मान्यता है कि मां कालरात्रि की आराधना से भक्तों को साहस मिलता है और भय से मुक्ति की कामना पूरी होती है।
आठवां दिन: मां महागौरी
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। अष्टमी के दिन कई स्थानों पर कन्या पूजन की परंपरा भी निभाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां महागौरी की कृपा से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री
नवरात्रि के अंतिम दिन यानी नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। देवी को सिद्धियों की दात्री माना गया है। इस दिन कई घरों और मंदिरों में कन्या पूजन भी किया जाता है। मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री की पूजा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और कार्यों में सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
नवरात्रि में क्यों की जाती है नौ स्वरूपों की पूजा?
नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों की आराधना शक्ति के अलग-अलग रूपों की उपासना मानी जाती है। भक्त इन दिनों उपवास, पूजा, मंत्र जाप और आरती के माध्यम से मां दुर्गा का स्मरण करते हैं। अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन की परंपरा भी कई परिवारों में निभाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में श्रद्धा और भक्ति के साथ देवी की आराधना करने से जीवन में सुख, शांति, शक्ति और समृद्धि की कामना की जाती है।
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