धर्म-अध्यात्म

गोवा के जंगलों में छिपा तांबड़ी सुरला महादेव मंदिर, प्राचीन शिव धरोहर का रहस्य

nidhi
28 Jun 2026 3:04 PM IST
गोवा के जंगलों में छिपा तांबड़ी सुरला महादेव मंदिर, प्राचीन शिव धरोहर का रहस्य
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गोवा के जंगलों में मिला इतिहास का खजाना, तांबड़ी सुरला महादेव मंदिर का अद्भुत रहस्य
Tambdi Surla Temple: गोवा का नाम आते ही अक्सर समुद्र तटों, नाइटलाइफ और पुर्तगाली विरासत की छवि सामने आती है, लेकिन इसी राज्य में एक अत्यंत प्राचीन और अनमोल हिंदू धरोहर भी स्थित है. दक्षिण-पूर्वी गोवा के घने जंगलों में स्थित तांबड़ी सुरला महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसे राज्य का सबसे प्राचीन जीवित मंदिर माना जाता है. 13वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर आध्यात्मिक शांति और ऐतिहासिक महत्व का अद्भुत संगम है.
इतिहास और संरक्षण की अनोखी कहानी
यह मंदिर भगवान महावीर अभयारण्य के घने वन क्षेत्र में स्थित है. इतिहासकारों के अनुसार इसका निर्माण कदंब वंश के शासनकाल में राजा रामचंद्र द्वारा कराया गया था. खास बात यह है कि यह गोवा के उन दुर्लभ मंदिरों में शामिल है जो पुर्तगाली आक्रमणों के दौरान सुरक्षित रहे. माना जाता है कि इसकी दुर्गम भौगोलिक स्थिति और घने जंगलों ने इसे आक्रमणकारियों की नजरों से दूर रखा. वर्तमान में यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय स्मारक है.
कदंब-यादव शैली की उत्कृष्ट वास्तुकला
तांबड़ी सुरला मंदिर प्राचीन कदंब-यादव स्थापत्य शैली का बेहतरीन उदाहरण है. इसका निर्माण पूरी तरह काले बेसाल्ट पत्थरों से किया गया है. सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि इसमें किसी प्रकार के सीमेंट, गारे या चूने का उपयोग नहीं हुआ, बल्कि इंटरलॉकिंग तकनीक से पत्थरों को जोड़कर संरचना बनाई गई है. मंदिर के स्तंभों पर रामायण, महाभारत और भगवान विष्णु के दशावतारों के सुंदर चित्र उकेरे गए हैं, जो उस समय की शिल्पकला को दर्शाते हैं.
महाशिवरात्रि और धार्मिक महत्व
यह मंदिर आज भी स्थानीय लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है. महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं. पूरी रात भजन-कीर्तन और शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा इस स्थान को अत्यंत पवित्र बनाती है. यह स्थल प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत मेल प्रस्तुत करता है.
कैसे पहुंचे तांबड़ी सुरला मंदिर
सड़क मार्ग से यह मंदिर पणजी से लगभग 65 किलोमीटर दूर स्थित है और NH-4A के रास्ते यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है. रेल मार्ग से सबसे नजदीकी स्टेशन कुलेम है, जो लगभग 12 किलोमीटर दूर है, जबकि मदगांव स्टेशन यहां से करीब 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. टैक्सी और स्थानीय परिवहन के माध्यम से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है.
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