धर्म-अध्यात्म

विनायक चतुर्थी पर बन रहा खास योग, इस शुभ मुहूर्त में करे पूजा

Subhi
1 Aug 2022 4:37 AM GMT
विनायक चतुर्थी पर बन रहा खास योग, इस शुभ मुहूर्त में करे पूजा
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सावन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी के नाम से जानते है। इस चतुर्थी काकाफी महत्व है, साथ ही सावन का सोमवार पड़ने के कारण इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है।

सावन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी के नाम से जानते है। इस चतुर्थी काकाफी महत्व है, साथ ही सावन का सोमवार पड़ने के कारण इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। ऐसे में इस दिन पूजा करने से विशेष फलों की प्राप्ति होगी। क्योंकि इस दिन गणपति के साथ-साथ भोले बाबा का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर मास में दो चतुर्थी पड़ती है पहली कृष्ण पक्ष में दूसरी शुक्ल पक्ष में। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से जानते हैं। वहीं जानिए सावन माह की विनायक चतुर्थी का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

सावन विनायक चतुर्थी व्रत 2022 शुभ मुहूर्त

सावन माह की विनायक चतुर्थी तिथि प्रारंभ- 01 अगस्त 2022, दिन सोमवार को प्रात: 4 बजकर 18 मिनट पर

सावन की विनायक चतुर्थी तिथि का समाप्त - 02 अगस्त 2022, मंगलवार को प्रात: 5 बजकर 13 मिनट पर

भगवान गणेश की पूजा का शुभ मुहूर्त - सुबह 11 बजकर 06 मिनट से दोपहर 01 बजकर 48 मिनट तक

अभिजीत मुहूर्त -सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक

परिघ योग - 31 जुलाई शाम 07 बजकर 11 मिनट से 1 अगस्त शाम 07 बजकर 03 मिनट तक

शिव योग - 1 अगस्त शाम 07 बजकर 03 मिनट से 2 अगस्त शाम 6 बजकर 37 मिनट कर

रवि योग- 1 अगस्त को सुबह 5 बजकर 42 मिनट से शाम 4 बजकर 6 मिनट तक

विनायक चतुर्थी पूजा विधि

विनायक चतुर्थी व्रत पर प्रातः काल सभी कामों ने निवृत्त होकर स्नान कर लें और लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण कर लें।

पूजा स्थल या फिर लकड़ी की चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर दें।

सबसे पहले पुष्प की मदद से थोड़ा सा जल छिड़के।

गणपति जी को सिंदूर, दूर्वा, फल, फूल और मिष्ठान अर्पित करें गणेश जी के मंत्रों का जाप करें।

अंत में प्रणाम कर प्रसाद वितरण करें

पूरे दिन फलाहारी व्रत रखकर अगले दिन पंचमी तिथि में व्रत का पारण करें।

पारण के दिन सुबह पुनः भगवान गणेश जी की विधिवत पूजा करने का प्रावधान है।


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