धर्म-अध्यात्म

सर्वपितृ अमावस्या पर ब्राह्मण भोज का खास समय, नोट कर लें शुभ मुहूर्त

nidhi
4 Oct 2026 12:17 PM IST
सर्वपितृ अमावस्या पर ब्राह्मण भोज का खास समय, नोट कर लें शुभ मुहूर्त
x
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या
सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष की अंतिम तिथि होती है। वर्ष 2026 में यह तिथि 10 अक्टूबर, शनिवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन उन सभी पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध किसी अन्य तिथि पर नहीं हो पाया। इसे पितरों की विदाई का दिन भी माना जाता है।
श्राद्ध कर्म के लिए कुतुप मुहूर्त को विशेष महत्व दिया जाता है। 10 अक्टूबर को कुतुप मुहूर्त का समय शहर के अनुसार अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए छतरपुर में यह सुबह 11:35 से दोपहर 12:22 बजे तक बताया गया है, जबकि अन्य पंचांगों में स्थानीय सूर्योदय के आधार पर समय अलग मिलता है। इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय देखना उचित रहेगा।
कुतुप मुहूर्त के बाद रौहिण मुहूर्त आता है और इसके बाद अपराह्न काल रहता है। श्राद्ध कर्म सामान्यतः इन्हीं समयावधियों में पूरा करने की परंपरा है। उपलब्ध पंचांग के अनुसार छतरपुर में रौहिण मुहूर्त 12:22 से 1:09 बजे तक और अपराह्न काल 1:09 से 3:29 बजे तक रहेगा।
ब्राह्मण भोज कब कराएं?
पितृ कर्म में ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान-दक्षिणा देना धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध कर्म के दौरान ब्राह्मण भोज कराया जाता है। कुतुप मुहूर्त से श्राद्ध कर्म शुरू करके रौहिण और अपराह्न काल में आगे की विधियां पूरी की जा सकती हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ब्राह्मण भोज श्रद्धा के साथ कराया जाना चाहिए। भोजन में सात्विक सामग्री रखने की परंपरा है। इसके बाद सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, अन्न या दक्षिणा का दान किया जा सकता है। श्राद्ध कर्म में दिखावे की जगह श्रद्धा और विधि-विधान को अधिक महत्व दिया जाता है।
किन पितरों के लिए करें श्राद्ध?
सर्वपितृ अमावस्या उन पूर्वजों के लिए विशेष मानी जाती है जिनकी मृत्यु तिथि परिवार को ज्ञात नहीं है। यदि किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं किया जा सका हो, तो भी इस दिन पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है। इसी वजह से इसे सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है।
इस दिन तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध जैसे कर्म किए जाते हैं। धार्मिक परंपरा में तिल और जल से तर्पण करने तथा पितरों का स्मरण करने का विशेष महत्व बताया गया है। कई परिवार अपनी परंपरा के अनुसार गाय, कौवे और अन्य जीवों को भोजन भी कराते हैं।
क्या रखें सावधानी?
पितृ पक्ष के दौरान सात्विक भोजन करने और मांसाहार तथा मदिरा से दूर रहने की धार्मिक मान्यता है। मांगलिक कार्यों से भी इस अवधि में परहेज किया जाता है। श्राद्ध कर्म करते समय परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के नियमों का पालन करना उचित माना जाता है।
श्राद्ध और तर्पण के समय जल्दबाजी से बचना चाहिए। यदि आपको विधि या मुहूर्त को लेकर संदेह है, तो स्थानीय पुरोहित या पंचांग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा, क्योंकि मुहूर्त शहर के अनुसार बदल सकता है।
सर्वपितृ अमावस्या 2026 में 10 अक्टूबर को मनाई जाएगी। यह पितृ पक्ष का समापन दिवस होगा। इस दिन श्रद्धा से पूर्वजों का स्मरण, तर्पण, श्राद्ध, ब्राह्मण भोज और दान करने की परंपरा है। कुतुप मुहूर्त को श्राद्ध कर्म के लिए प्रमुख समय माना जाता है, लेकिन सटीक समय अपने शहर के पंचांग से जरूर जांचना चाहिए।
Next Story