धर्म-अध्यात्म

प्रदोष व्रत पूजा से पुत्र कामना पूर्ण होगी जानिए महत्त्व

Dev upase
15 Jan 2022 10:07 AM GMT
प्रदोष व्रत पूजा से पुत्र कामना पूर्ण होगी जानिए महत्त्व
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प्रदोष का व्रत हर महीने में दो बार रखा जाता है. ​सप्ताह के अलग अलग दिन के हिसाब से इस व्रत का महत्व और नाम बदल जाते हैं

जनता से रिश्ता वेबडेस्क | हर माह की शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) रखा जाता है. ये व्रत सुख-समृद्धि और सौभाग्य देने वाला है और इसे रखने से महादेव और माता गौरी दोनों की कृपा प्राप्त होती है. लेकिन त्रयोदशी तिथि (Trayodashi) सप्ताह में जिस दिन पड़ती है, उसके हिसाब से इस व्रत का नाम और महत्व दोनों बदल जाते हैं. हर प्रदोष अलग फल देने वाला माना गया है. मान्यता है कि अगर व्यक्ति पूरी श्रद्धा से महादेव और माता पार्वती (Mahadev and Mata Parvati) के इस व्रत को करे, तो उसकी मनोकामना हर हाल में पूरी होती है. आज 15 जनवरी को शनि प्रदोष का व्रत रखा जा रहा है. इस मौके पर आप यहां जानिए कि कौन सा प्रदोष व्रत किस मनोकामना को पूरा करने वाला है.

रवि प्रदोष
रविवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को रवि प्रदोष या भानु प्रदोष के नाम से जाना जाता है. ये व्रत आपको शिव के साथ सूर्य की कृपा का भी पात्र बनाता है. इसे रखने से आपके जीवन में मान सम्मान, यश, लंबी आयु, सुख और शांति मिलती है.
सोम प्रदोष
सोमवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष ​कहा जाता है. ये व्रत सभी इच्छाओं की पूर्ति करने वाला है. इसे रखने से आपको मानसिक रूप से शांति मिलती है और जीवन में उथल पुथल समाप्त होती है और तनाव से ​मुक्ति मिलती है. इसके अलावा सोम प्रदोष को मोक्षदायी माना गया है.
भौम प्रदोष
मंगलवार के दिन पड़ने वाले व्रत को भौम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है. ये व्रत कर्ज से मुक्ति दिलाने वाला है, साथ ही सेहत से जुड़ी समस्याओं को दूर करने वाला माना जाता है.
बुध प्रदोष
बुधवार को रखा जाने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष या सौम्यवारा प्रदोष कहा जाता है. इस व्रत को रखने से व्यक्ति को बुद्धि कौशल प्राप्त होता है और वो शिक्षा और ज्ञान प्राप्त करता है. इस व्रत को रखने से भी व्यक्ति की हर कामना पूरी हो सकती है.
गुरु प्रदोष
गुरुवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को गुरु प्रदोष के नाम से जाना जाता है. इसे रखने से शत्रुओं का नाश होता है. इसके अलावा ये व्रत सफलता दिलाने वाला माना गया है. इसे रखने से पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है.
शुक्र प्रदोष
शुक्रवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को शुक्र प्रदोष के अलावा भ्रुगुवारा प्रदोष भी कहा जाता है. ये व्रत जीवन में सुख समृद्धि और वैभव प्रदान करने वाला माना गया है. साथ ही ये सौभाग्य वृद्धि करता है.
शनि प्रदोष
शनिवार के दिन रखा जाने वाला शनि प्रदोष व्रत संतान प्राप्ति की कामना को पूरा करता है. साथ ही करियर ग्रोथ और नौकरी में पदोन्नति की कामना को पूर्ण कर सकता है.


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