धर्म-अध्यात्म

संकष्टी चतुर्थी के दिन कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए,जिससे भगवान गणेश जी नाराज न हो

Kajal Dubey
18 Feb 2022 2:08 AM GMT
संकष्टी चतुर्थी के दिन कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए,जिससे भगवान गणेश जी नाराज न हो
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फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहलाती है

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। फाल्गुन माह (Phalguna Month) की संकष्टी चतुर्थी 20 फरवरी दिन रविवार को है. फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी (Dwijapriya Sankashti Chaturthi) कहलाती है. हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है और विघ्नहर्ता श्री गणेश जी (Lord Ganesha) की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है. पूजा के समय संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा (Sankashti Chaturthi Vrat Katha) का श्रवण किया जाता है. गणपति बप्पा की कृपा से सब दुख दूर होते हैं, सभी कार्य बिना किसी बाधा के सफल होते हैं, जीवन में सुख, समृद्धि एवं सौभाग्य बढ़ता है. जो लोग संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखते हैं, उनको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, नहीं तो भगवान गणेश जी नाराज हो सकते हैं. आइए जानते हैं कि संकष्टी चतुर्थी के दिन क्या नहीं करना चाहिए.

संकष्टी चतुर्थी 2022 क्या न करें
1. यदि आप संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा कर रहे हैं, तो तुलसी का पत्ता भोग या प्रसाद में न शामिल करें. तुलसी गणेश जी से शापित हैं, उनको गणेश पूजा से वर्जित किया गया है.
2. संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रती को काले कपड़े नहीं पहनना चाहिए. इसे नकारात्मकता का प्रतीक मानते हैं.
3. आप संकष्टी चतुर्थी का व्रत हैं, तो भूलवश भी गणेश जी के वाहन मूषक (चूहे) को परेशान न करें. ऐसा करने से गणेश जी नाराज हो सकते हैं.
4. संकष्टी चतुर्थी को पूजा के बाद पारण वाले भोजन में चुकंदर, गाजर, मूली, शकरकंद, कटहल, लहसुन, प्याज आदि का सेवन न करें. ये वर्जित होते हैं. यदि आप ऐसा करते हैं तो आपको व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होगा.
5. संकष्टी चतुर्थी के दिन आप भी तुलसी का सेवन न करें क्योंकि यह व्रत गणेश जी के लिए है. ऐसा करने से वे क्रोधित हो सकते हैं.
6. संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा के पूजन एवं जल अर्पित करने के बिना पूर्ण नहीं होता है. यदि आप यह नहीं करते हैं, तो आपका व्रत सफल नहीं होगा.
7. संकष्टी चतुर्थी व्रत से पूर्व तामसिक भोजन का उपयोग न करें. व्रत के समय किसी के बारे में भला बुरा न सोचें और न ही कहें. मन, कर्म और वचन से शुद्ध रहते हुए व्रत करें. बुरे मन से किए गए कार्यों का फल भी नकारात्मक ही प्राप्त होता है. ऐसा करने से बचें.


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