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धर्म-अध्यात्म
कुछ ऐसी स्थल जहाँ Ravana का दहन नहीं होता — वजह है बेहद खास
Harrison
30 Sept 2025 9:45 PM IST

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Religion Spirituality , धर्म अध्यात्म : भारत में दशहरा त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, जिसमें रावण का पुतला दहन मुख्य आकर्षण होता है। लेकिन कुछ खास स्थान ऐसे भी हैं जहाँ रावण का दहन नहीं होता, बल्कि उसकी पूजा की जाती है। इस परंपरा की वजहें बहुत खास और सांस्कृतिक हैं। आइए जानें कि किन जगहों पर रावण की पूजा होती है और इसके पीछे क्या कारण हैं।
1. बिसरख (उत्तर प्रदेश)
बिसरख गांव को रावण का जन्मस्थान माना जाता है। यहां दशहरा पर रावण के पुतले को जलाने की बजाय उसकी पूजा की जाती है। स्थानीय लोग मानते हैं कि रावण उनके पूर्वज हैं और उसे जलाना अपमानजनक होगा। इसलिए दशहरा के दौरान यहां शोक मनाया जाता है और रावण की आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना की जाती है।
2. बस्तर (छत्तीसगढ़)
बस्तर के दशहरा उत्सव में रावण दहन नहीं होता। यह उत्सव लगभग 75 दिनों तक चलता है, जिसमें देवी दंतेश्वरी की पूजा प्रमुख होती है। माना जाता है कि यह क्षेत्र कभी रावण का राज्य था, इसलिए यहां उसे बुरा नहीं माना जाता। इसके स्थान पर देवी की आराधना और सामूहिक आयोजन होते हैं।
3. मंदसौर (मध्य प्रदेश)
मंदसौर क्षेत्र को रावण की पत्नी मंदोदरी का पैतृक स्थान माना जाता है। यहां दशहरा के दौरान रावण की पूजा की जाती है और उसका पुतला नहीं जलाया जाता। स्थानीय लोग रावण को एक महान योद्धा और विद्वान मानते हैं, इसलिए उसका सम्मान करते हैं।
4. जोधपुर (राजस्थान)
जोधपुर के कुछ समाजों में रावणवंशी कहलाने वाले लोग हैं जो रावण को अपने पूर्वज मानते हैं। यहां दशहरा पर रावण का दहन नहीं होता बल्कि पूजा की जाती है। यह परंपरा रावण के प्रति सम्मान और उनके वंश को बचाए रखने के लिए निभाई जाती है।
5. कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में रावण को भगवान शिव का परम भक्त माना जाता है। यहां रावण के पुतले को जलाने की बजाय उसे श्रद्धांजलि दी जाती है। स्थानीय मान्यता है कि रावण ने यहां तपस्या की थी और इसलिए उसकी पूजा की जाती है।
रावण पूजा की वजहें
वंशीय सम्मान: कुछ स्थानों पर लोग खुद को रावण के वंशज मानते हैं।
संस्कृति और परंपरा: वहां दशहरा का महत्व रावण दहन से अलग होता है।
धार्मिक आस्था: रावण को शिवभक्त या विद्वान माना जाता है, जिससे उसका सम्मान किया जाता है।
स्थानीय विश्वास: यह माना जाता है कि रावण का दहन करने से उन जगहों पर विपत्ति आ सकती है।
रावण के प्रति सम्मान और पूजा भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती है। जहाँ एक ओर दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है, वहीं कुछ स्थानों की अपनी अनूठी परंपराएं हैं जो हमें इतिहास और आस्था की गहराई से परिचित कराती हैं।
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