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धर्म-अध्यात्म
कहीं 'कॉपी-पैन' तो कहीं 'बसंती काकेरा', इन बड़े मंदिरों में मां सरस्वती को लगता है विशेष भोग
SHIDDHANT
21 Jan 2026 11:11 PM IST

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Delhi दिल्ली। देशभर में बसंत पंचमी का त्योहार 23 जनवरी को मनाया जाएगा। ऐसे मौके पर मंदिरों में विशेष अनुष्ठानों का आयोजन होता है और मां सरस्वती को विशेष प्रकार के भोग भी लगाए जाते हैं। बसंत के आगमन के साथ ही मां को ज्ञान की वस्तुओं के अलावा, पीला भोग और वस्त्र भी बहुत प्रिय हैं। आज हम उत्तर से लेकर दक्षिण तक के कुछ बड़े मंदिरों में चढ़ने वाले विशेष भोग के बारे में बताएंगे।
राजस्थान के बसंतगढ़ में मां सरस्वती को समर्पित विशेष मंदिर सरस्वती उद्गम मंदिर स्थित है, जहां बसंत पंचमी के दिन मंदिर में लाखों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की विशेषता मां को लगने वाला भोग भी है। मंदिर में मां को भोग स्वरूप मिष्ठान के अलावा, कॉपी और पैन भी चढ़ाते हैं। भक्त विशेष रूप से मां को कॉपी और पैन भेंट करते हैं।
आंध्र प्रदेश के वारंगल सरस्वती मंदिर में बसंत पंचमी के दिन बच्चों और विद्यार्थियों के लिए विशेष अक्षराभ्यास का आयोजन किया जाता है और मां को केसरिया मीठे चावल, मीठे पूए और पीले मिष्ठान का भोग लगता है। बच्चे और विद्यार्थी दोनों ही बसंत पंचमी के दिन मां का आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं।
ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ मंदिर में बसंत पंचमी का त्योहार अनोखे तरीके से मनाया जाता है। बसंत पंचमी के दिन मंदिर में मां सरस्वती और प्रभु जगन्नाथ को 'बसंत काकेरा' का भोग लगता है। प्रसाद को प्रभु जगन्नाथ के अलावा, 'दक्षिण घर' में चढ़ाया जाता है, जहां मां लक्ष्मी और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं मौजूद हैं। बसंत काकेरा गेहूं और चावल के आटे से बना मीठा भोग होता है।
मध्य प्रदेश के मैहर में स्थित 51 शक्तिपीठों में से शारदा देवी मंदिर में बसंत पंचमी की रौनक अलग ही देखने को मिलती है। बसंत पंचमी के दिन मंदिर में मां शारदा को हलवा-पूरी और केसरिया खीर का भोग लगाया जाता है और मां को पीले वस्त्र भी पहनाए जाते हैं। भक्त भी बड़ी संख्या में पीले फूल और पीले मिष्ठान लेकर मंदिर पहुंचते हैं। तेलंगाना के बसरा में स्थित ज्ञान सरस्वती मंदिर में भी बसंत पंचमी के दिन मंदिर में अनुष्ठान और 'अक्षराभ्यासम' का आयोजन होता है और भोग के रूप में पीले मीठे चावल और पीली बुंदी के लड्डू चढ़ाए जाते हैं।
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