धर्म-अध्यात्म

25 जून को व्रत, भद्रा और 4 शुभ योगों से बढ़ा महत्व

Ratna Netam
20 Jun 2026 4:46 PM IST
25 जून को व्रत, भद्रा और 4 शुभ योगों से बढ़ा महत्व
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अधिक फलदायी माना जाता है।

Religion धर्म : में निर्जला एकादशी का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह वर्षभर आने वाली सभी एकादशियों में सबसे कठिन और फलदायी व्रतों में से एक मानी जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को बिना जल ग्रहण किए रखा जाता है, इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जो लोग वर्ष की सभी एकादशी का व्रत नहीं रख पाते, वे यदि केवल निर्जला एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियम से करें, तो उन्हें सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।

इस वर्ष निर्जला एकादशी 25 जून 2026 को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार इस दिन विशेष योगों का संयोग बन रहा है, जो इस व्रत के महत्व को और अधिक बढ़ाता है। हालांकि इस दिन भद्रा का साया भी रहेगा, लेकिन इसके साथ ही कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिन्हें धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ऐसे योगों में किया गया पूजा-पाठ और व्रत अधिक फलदायी माना जाता है।

निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और दिनभर उपवास रखते हैं। व्रत में जल तक का सेवन वर्जित होता है, इसलिए यह व्रत शारीरिक और मानसिक रूप से काफी कठिन माना जाता है। इसके बावजूद श्रद्धालु इस व्रत को पूरी आस्था और नियमों के साथ निभाते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन जल, भोजन, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है, जिससे घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।

इस व्रत को लेकर यह भी मान्यता है कि जो व्यक्ति इसे पूर्ण श्रद्धा के साथ करता है, उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। कई लोग इस दिन मंदिरों में जाकर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी करते हैं।

निर्जला एकादशी को लेकर यह भी कहा जाता है कि यह व्रत शरीर की सहनशक्ति और आत्मसंयम की परीक्षा लेता है। बिना जल के उपवास रखने से व्यक्ति को आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है और मन में संयम की भावना बढ़ती है। यही कारण है कि इसे सबसे कठिन और श्रेष्ठ एकादशी व्रत माना गया है।

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि निर्जला एकादशी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और संयम का भी प्रतीक है। 25 जून 2026 को मनाई जाने वाली यह एकादशी श्रद्धालुओं के लिए विशेष अवसर लेकर आ रही है, जिसमें शुभ योगों का संयोग इसे और भी फलदायी बना रहा है।

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