धर्म-अध्यात्म

Shiva पूजा अधूरी मानी जाती है बिना इस प्रदोष व्रत कथा के

Ratna Netam
11 July 2026 3:06 PM IST
Shiva  पूजा अधूरी मानी जाती है बिना इस प्रदोष व्रत कथा के
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New Delhi नई दिल्ली : हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। इस बार 12 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। रविवार के दिन पड़ने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि रवि प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव के साथ-साथ सूर्यदेव का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।

प्रदोष व्रत की पूजा को कथा के बिना अधूरा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इस व्रत से जुड़ी एक प्राचीन कथा में भगवान शिव की कृपा और सच्ची भक्ति की शक्ति का वर्णन मिलता है।

गरीब ब्राह्मण परिवार की कथा

रवि प्रदोष व्रत की कथा के अनुसार, एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण अपनी पत्नी और छोटे बेटे के साथ रहता था। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। घर का खर्च चलाना भी उनके लिए काफी मुश्किल था। हालांकि, ब्राह्मण की पत्नी भगवान शिव की परम भक्त थी। उसे भगवान शिव पर पूरा विश्वास था और वह हर प्रदोष व्रत पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करती थी।

वह भगवान शिव से अपने परिवार की सुख-शांति और परेशानियों को दूर करने की प्रार्थना करती थी। एक दिन उसका बेटा स्नान करने के लिए घर से बाहर गया। रास्ते में कुछ डाकुओं ने उसे रोक लिया। डाकुओं को लगा कि लड़के के पास कोई धन या कीमती सामान हो सकता है।

डाकुओं ने उसकी तलाशी ली, लेकिन उन्हें केवल खाने की पोटली के अलावा कुछ नहीं मिला। लड़के ने अपनी गरीबी और मजबूरी बताते हुए उन्हें छोड़ देने की विनती की। उसकी मासूमियत और सादगी देखकर डाकुओं का मन बदल गया और उन्होंने उसे बिना नुकसान पहुंचाए वहां से जाने दिया।

निर्दोष लड़के को मिली सजा

लड़का आगे बढ़ता रहा। शाम होने तक वह काफी थक गया था, इसलिए एक पेड़ के नीचे आराम करने लगा और वहीं उसकी आंख लग गई। उसी दौरान इलाके में चोरी की एक घटना हुई थी और सैनिक चोरों की तलाश कर रहे थे।

जब सैनिकों की नजर सो रहे लड़के पर पड़ी तो उन्होंने बिना पूरी जांच किए उसे ही चोर समझ लिया। वे उसे पकड़कर राजा के दरबार में ले गए। राजा ने भी मामले की पूरी सच्चाई जाने बिना उसे दोषी मान लिया और जेल भेजने का आदेश दे दिया।

मां की भक्ति से प्रसन्न हुए भगवान शिव

उधर, जब देर रात तक बेटा घर नहीं लौटा तो उसकी मां काफी परेशान हो गई। अगले दिन रवि प्रदोष व्रत था। उसने भगवान शिव पर विश्वास रखते हुए व्रत रखा और अपने बेटे की सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना की।

उसने पूरी श्रद्धा से भगवान शिव की पूजा की और शिवलिंग का अभिषेक कर अपने पुत्र की रक्षा की कामना की। मां की सच्ची भक्ति से भगवान शिव प्रसन्न हुए।

कथा के अनुसार, उसी रात राजा को सपने में भगवान शिव के दर्शन हुए। भगवान शिव ने राजा से कहा कि जिस लड़के को उसने जेल में बंद किया है, वह पूरी तरह निर्दोष है। उसे तुरंत मुक्त कर दिया जाए, अन्यथा इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

राजा को हुआ अपनी गलती का एहसास

सुबह होते ही राजा ने लड़के को दरबार में बुलाया और पूरे मामले की जांच कराई। जब वास्तविकता सामने आई तो राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने तुरंत लड़के को रिहा कर दिया।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस कथा से यह संदेश मिलता है कि सच्ची श्रद्धा और भगवान पर अटूट विश्वास रखने वाले भक्तों की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं। रवि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा, व्रत और कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है। भक्त इस दिन भगवान शिव से परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं।

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