धर्म-अध्यात्म

Sheetala Ashtami 2026: देवी मां की पूजा से रोगों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना

Harrison
10 Feb 2026 9:21 PM IST
Sheetala Ashtami  2026: देवी मां की पूजा से रोगों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना
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Religion Spirituality धर्म अध्यात्म : चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर इस वर्ष शीतला अष्टमी 2026 मनाई जा रही है। यह व्रत विशेष रूप से देवी मां शीतला को समर्पित होता है, जिन्हें भारतीय पौराणिक और लोक परंपरा में संक्रांति और रोग निवारण की देवी माना जाता है। शीतला अष्टमी का व्रत प्रत्येक वर्ष बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ वैदिक और पारंपरिक पूजा की परंपरा मजबूत है।
इस दिन भक्तजन अपने घरों और मंदिरों में देवी शीतला की भक्ति और श्रद्धा के साथ पूजा अर्चना करते हैं। परंपरा के अनुसार, मां शीतला की कृपा पाने के लिए व्रतधारी ठंडे पानी के प्रयोग, प्रसाद के रूप में दलिया या खिचड़ी और विशेष रूप से मूली या कद्दू के पकवान बनाकर देवी को अर्पित करते हैं। कुछ जगहों पर यह भी मान्यता है कि व्रतधारी को इस दिन नमक और तेल का सेवन नहीं करना चाहिए।
पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि मां शीतला संक्रांति और बुखार जैसी बीमारियों से मुक्ति देने वाली देवी हैं। कहा जाता है कि जो श्रद्धालु इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखते हैं और देवी की पूजा करते हैं, उन्हें जीवन में सभी प्रकार के सुख और समृद्धि प्राप्त होती है। साथ ही, उनके घर में रोग और शारीरिक कष्टों का प्रभाव कम होता है। शीतला अष्टमी के दिन घर और आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा रखना भी अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शीतला अष्टमी केवल धार्मिक व्रत ही नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य और स्वच्छता के महत्व की भी याद दिलाती है। पुराने समय में यह पर्व बच्चों और वृद्धजनों को रोगों से बचाने के लिए आयोजित किया जाता था। मां शीतला की पूजा का एक बड़ा उद्देश्य समाज में स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना भी है। इसलिए इस दिन भक्तजन मंदिर और घर की सफाई पर विशेष ध्यान देते हैं और रोगाणुओं के संक्रमण से बचाव के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखते हैं।
इस अवसर पर विभिन्न स्थानों के मंदिरों में विशेष पूजा, हवन और भजन-संकीर्तन का आयोजन किया जाता है। भक्तजन भक्ति भाव से देवी के सामने दीपक जलाते हैं, फूल, दही, हल्दी, चावल और अन्य पारंपरिक सामग्री चढ़ाते हैं। व्रतधारी दिनभर उपवास रखते हैं और रात में या अगले दिन अपने व्रत का पारण करते हैं। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मां शीतला की आराधना करने वाले परिवारों में सदैव स्वास्थ्य और खुशहाली बनी रहती है।
आज के समय में शीतला अष्टमी का पर्व सिर्फ धार्मिक रूप से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व लोगों को स्वच्छता, स्वास्थ्य और रोगमुक्त जीवन के महत्व के प्रति जागरूक करता है। साथ ही, यह अवसर परिवार और समुदाय को एक साथ लाने का काम करता है, जब लोग मिलकर पूजा करते हैं और सामूहिक रूप से परंपराओं को निभाते हैं।
इस प्रकार, शीतला अष्टमी 2026 का पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक एकता का संदेश भी देता है। इस दिन घर-घर और मंदिरों में श्रद्धालु देवी मां शीतला की पूजा कर जीवन में सुख, समृद्धि और रोगमुक्त जीवन की कामना करते हैं।
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