धर्म-अध्यात्म

25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा, जानिए लक्ष्मी-विष्णु पूजन का महत्व

nidhi
20 Oct 2026 9:54 AM IST
25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा, जानिए लक्ष्मी-विष्णु पूजन का महत्व
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शरद पूर्णिमा
शरद पूर्णिमा २०२६: आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला शरद पूर्णिमा का पर्व इस वर्ष रविवार, 25 अक्टूबर को पड़ेगा। इस अवसर पर चंद्रमा को अर्घ्य देने, खीर का भोग लगाने और लक्ष्मी-विष्णु की आराधना की परंपरा है। विभिन्न क्षेत्रों में इसे कोजागरी पूर्णिमा और कुमार पूर्णिमा जैसे नामों से भी मनाया जाता है। हालांकि, पूजा की विधि और आराध्य देवताओं को लेकर क्षेत्रीय परंपराएं अलग-अलग हैं।
भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मी पूजन क्यों?
धार्मिक परंपरा में पूर्णिमा का संबंध भगवान विष्णु की उपासना से माना जाता है। मां लक्ष्मी उनकी अर्धांगिनी और समृद्धि की देवी के रूप में पूजी जाती हैं। शरद पूर्णिमा पर दोनों की संयुक्त आराधना सुख, शांति और कल्याण की कामना से की जाती है। इसे केवल इसी पूर्णिमा तक सीमित नियम नहीं समझना चाहिए। लक्ष्मी-विष्णु की संयुक्त पूजा अन्य अवसरों पर भी होती है। शरद पूर्णिमा की विशेषता इसके साथ जुड़ी कोजागरी लक्ष्मी पूजा और रात्रि जागरण की परंपरा है।
कोजागरी की रात से जुड़ी मान्यता
लोकमान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और पूछती हैं—कौन जाग रहा है? इसी भाव को ‘को जागर्ति’ से जोड़कर कोजागरी नाम की व्याख्या की जाती है।
इस अवसर पर श्रद्धालु पूजा, भजन और जागरण करते हैं। बंगाल सहित कुछ क्षेत्रों में कोजागरी लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व है। वहीं, अन्य स्थानों पर चंद्र पूजन या राधा-कृष्ण की आराधना प्रमुख रहती है।
दिवाली की पूजा से क्या है अंतर?
दोनों पर्वों में पहला अंतर तिथि का है। शरद पूर्णिमा आश्विन शुक्ल पूर्णिमा को आती है, जबकि उत्तर भारतीय पंचांग परंपरा में दिवाली की लक्ष्मी पूजा कार्तिक अमावस्या को होती है।
दिवाली पर अनेक परिवारों में लक्ष्मी और गणेश का संयुक्त पूजन किया जाता है। व्यापारिक प्रतिष्ठानों में बही-खातों की पूजा की परंपरा भी है। शरद पूर्णिमा में चंद्रमा, चांदनी, खीर और रात्रि जागरण का विशेष स्थान है। दोनों अवसरों पर समृद्धि की कामना की जाती है, लेकिन उनके अनुष्ठान समान नहीं हैं।
खीर और चांदनी का महत्व
शरद पूर्णिमा की रात खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा प्रचलित है। धार्मिक विश्वास में इस रात की चांदनी को विशेष शुभता से जोड़ा जाता है। चंद्र किरणों से खीर में अमृत या औषधीय गुण आने का वर्णन आस्था का विषय है; इसे प्रमाणित वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
कब शुरू होगी पूर्णिमा तिथि?
नई दिल्ली के लिए पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी। शरद पूर्णिमा का रात्रि पूजन 25 अक्टूबर को किया जाएगा। स्थानीय चंद्रोदय और पूजा का समय जानने के लिए अपने शहर का पंचांग देखना उचित रहेगा।
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