धर्म-अध्यात्म

कुंभ राशि वालों के लिए बेहद खास है शनैश्चरी अमावस्या, जानें इससे जुड़े रोचक तथ्य

Gulabi
12 March 2021 7:32 AM GMT
कुंभ राशि वालों के लिए बेहद खास है शनैश्चरी अमावस्या, जानें इससे जुड़े रोचक तथ्य
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हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन का महीना सबसे आखिरी और बेहद खास महीना माना गया है

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन का महीना सबसे आखिरी और बेहद खास महीना माना गया है. इसी माह में महाशिवरात्रि और होली जैसे पर्व मनाए जाते हैं. फाल्गुन के महीने की अमावस्या का भी विशेष महत्व है. इस बार शनिवार के दिन ये अमावस्या पड़ने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है. शनिवार के दिन जब अमावस्या तिथि पड़ती है तो इसे शनैश्चरी अमावस्या या शनि अमावस्या कहा जाता है.


शनि अमावस्या पर दान और स्नान का विशेष महत्व है, साथ ही पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म भी किए जाते हैं. राहु-केतु से निर्मित कालसर्प दोष और पितृदोष की शांति कराने के लिए भी ये दिन काफी उत्तम माना जाता है. इसके अलावा जो लोग शनिदोष, साढ़ेसाती, शनि की ढैया से प्रभावित हैं, उन्हें इस दिन शनिदेव की पूजा करनी चाहिए. इससे उनके तमाम कष्ट दूर होते हैं.
जानिए क्या होती है अमावस्या
हिन्दू पंचांग के अनुसार माह के 30 दिन को चंद्र कला के आधार पर 15-15 दिन के दो पक्षों में बांटा गया है. शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष. शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन को पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस्या कहा जाता है. अमावस्या को सूर्य और चंद्रमा के मिलन का समय माना जाता है. इस दिन सूर्य और चंद्र दोनों एक ही राशि में होते हैं.

कुंभ राशि वालों के लिए बेहद खास है शनैश्चरी अमावस्या
13 मार्च 2021 को अमावस्या का दिन कुंभ राशि वालों के लिए बेहद खास माना जा रहा है. इस दिन शनि की राशि कुंभ में चतुर्ग्रही योग बन रहा है. इस दिन सूर्य, चंद्र, बुध, और शुक्र चारों ग्रह एक ही राशि में होंगे. शनि कुंभ राशि के स्वामी होते हैं. कुंभ राशि के जातकों पर इस समय साढ़े साती भी चल रही है. ऐसे में वे शनि के विशेष उपाय करके शनिदेव को प्रसन्न कर सकते हैं और साढ़ेसाती से मुक्ति पा सकते हैं.

अमावस्या से जुड़े रोचक तथ्य
1. शास्त्रों में अमावस्या तिथि का स्वामी पितृदेव को माना जाता है. इसलिए इस दिन पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण, दान-पुण्य का विशेष महत्व है.

2. अमावस्या पर तीर्थ स्नान, जाप और व्रत करने से ऋण और सभी पापों से मुक्ति मिलती है.

3. ज्योतिष में चंद्र को मन का देवता माना गया है. अमावस्या के दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता. ऐसे में मन में नकारात्मक विचार बढ़ते हैं. जो लोग अति भावुक होते हैं, उन पर इस बात का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है.

4. अमा नाम की चंद्र की एक महाकला है, जिसमें चंद्र की सोलह कलाओं की शक्तियां शामिल हैं. इस कला का क्षय और उदय नहीं होता है.

5. जो लोग अमावस्या पर व्रत रखना चाहते हैं, उन्हें इस दिन सिर्फ दूध का सेवन करना चाहिए. आमतौर पर ये व्रत एक वर्ष तक किया जाता है.


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