धर्म-अध्यात्म

सावन सोमवारी 2026: आखिरी सोमवार पर बन रहा दुर्लभ संयोग जानें तिथि और समय

Ashish verma
19 Aug 2026 10:56 AM IST
सावन सोमवारी 2026: आखिरी सोमवार पर बन रहा दुर्लभ संयोग जानें तिथि और समय
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Religion धर्म : सावन का अंतिम सोमवार 24 अगस्त को, बन रहे हैं 5 शुभ संयोग; रुद्राभिषेक के लिए बेहद खास रहेगा दिन

हिंदू धर्म में सावन महीने का विशेष महत्व माना जाता है। भगवान शिव को समर्पित इस पवित्र महीने में सोमवार के दिन शिव पूजा, व्रत और रुद्राभिषेक करने का विशेष फल मिलता है। साल 2026 में सावन का अंतिम सोमवार 24 अगस्त को पड़ रहा है। इस दिन कई शुभ योग और संयोग बन रहे हैं, जो इसे बेहद खास बना रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के अंतिम सोमवार को भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

ज्योतिष गणना के अनुसार, 24 अगस्त को सूर्य देव सिंह राशि में और चंद्रमा धनु राशि में विराजमान रहेंगे। ग्रहों की यह स्थिति कई शुभ प्रभाव लेकर आएगी। इस दिन भगवान शिव का वास कैलाश पर माना जा रहा है, इसलिए रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र जाप और विशेष पूजा के लिए यह दिन अत्यंत फलदायी रहेगा।

सावन के अंतिम सोमवार पर बन रहे हैं 5 शुभ संयोग

धार्मिक पंचांग के अनुसार, सावन के चौथे और अंतिम सोमवार को पांच शुभ संयोगों का निर्माण हो रहा है। इन शुभ योगों में शिव आराधना करने से विशेष पुण्य प्राप्त होने की मान्यता है।

पहला शुभ संयोग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से बन रहा है। इस दिन सूर्य सिंह राशि में रहेंगे और चंद्रमा धनु राशि में रहेंगे। ज्योतिष में इन दोनों ग्रहों की स्थिति को शुभ और सकारात्मक ऊर्जा देने वाला माना जाता है।

दूसरा संयोग सावन सोमवार का है। सोमवार का दिन स्वयं भगवान शिव को समर्पित होता है और सावन महीने में इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने वाले भक्तों पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है।

तीसरा शुभ संयोग भगवान शिव के कैलाश वास का है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव कैलाश पर्वत पर विराजमान रहेंगे। इसलिए शिवलिंग का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से शुभ फल मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

चौथा संयोग पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए अनुकूल समय का है। इस दिन शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, बेलपत्र अर्पण और मंत्र जाप करने से आध्यात्मिक लाभ मिलता है।

पांचवां संयोग ग्रह-नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति से जुड़ा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन किए गए धार्मिक कार्य लंबे समय तक सकारात्मक प्रभाव देने वाले हो सकते हैं।

रुद्राभिषेक के लिए बेहद खास दिन

सावन के अंतिम सोमवार पर रुद्राभिषेक करने का विशेष महत्व बताया गया है। भगवान शिव के रुद्र स्वरूप की पूजा करने के लिए रुद्राभिषेक सबसे प्रभावशाली पूजा विधियों में से एक मानी जाती है। इसमें शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है।

मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन रुद्राभिषेक करने से घर में सुख-शांति आती है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में आने वाली परेशानियां कम होती हैं। भक्त इस दिन भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भस्म और फूल अर्पित करते हैं।

शिव पूजा में इन बातों का रखें ध्यान

सावन के अंतिम सोमवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान शिव का ध्यान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद शिवलिंग पर जल चढ़ाकर पंचामृत से अभिषेक किया जा सकता है। पूजा के दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करना लाभकारी माना जाता है।

भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करते समय ध्यान रखना चाहिए कि बेलपत्र साफ और बिना कटे हुए हों। साथ ही पूजा में श्रद्धा और भक्ति का विशेष महत्व बताया गया है।

व्रत और पूजा से मिलते हैं ये लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन सोमवार का व्रत करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। अविवाहित लोगों के लिए यह व्रत अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए शुभ माना जाता है। वहीं, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और परिवार की खुशहाली के लिए भी लोग सावन सोमवार का व्रत रखते हैं।

सावन का अंतिम सोमवार होने के कारण 24 अगस्त का दिन शिव भक्तों के लिए विशेष अवसर लेकर आ रहा है। इस दिन मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ देखने को मिल सकती है। लोग भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा करेंगे।

इस पवित्र दिन पर श्रद्धा और नियमों के साथ भगवान शिव की आराधना करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की धार्मिक मान्यता है। सावन के अंतिम सोमवार का यह शुभ अवसर शिव भक्तों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और आस्था से भरपूर रहेगा।

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