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धर्म-अध्यात्म
3 अगस्त से शुरू होंगे सावन सोमवार, जानें व्रत की तारीखें
Tara Tandi
16 July 2026 4:45 PM IST

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Sawan Somvar ज्योतिष न्यूज़: भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस पूरे महीने भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, व्रत और मंत्र जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि सावन का इंतजार शिव भक्त पूरे वर्ष करते हैं। इस दौरान देशभर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, वहीं कांवड़ यात्रा, शिव आराधना और भक्ति का माहौल चारों ओर देखने को मिलता है। वर्ष 2026 में सावन का शुभारंभ 30 जुलाई से होगा और इसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन होगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार सावन के महीने में चार सावन सोमवार और चार मंगला गौरी व्रत पड़ेंगे। विशेष बात यह है कि पहला सावन सोमवार कई शुभ योगों के संयोग में आ रहा है, जिससे इस दिन भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक और व्रत का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
सावन सोमवार 2026 की तारीखें
अगर आप सावन सोमवार का व्रत रखने की योजना बना रहे हैं, तो इन महत्वपूर्ण तिथियों को नोट कर लें—
पहला सावन सोमवार – 3 अगस्त 2026
दूसरा सावन सोमवार – 10 अगस्त 2026
तीसरा सावन सोमवार – 17 अगस्त 2026
चौथा और अंतिम सावन सोमवार – 24 अगस्त 2026
पहला सावन सोमवार क्यों रहेगा खास?
इस वर्ष 3 अगस्त को पड़ने वाला पहला सावन सोमवार विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। यह दिन श्रावण कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि में आएगा। इस दौरान उत्तरभाद्रपदा और रेवती नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। साथ ही सुकर्मा योग और धृति योग का संयोग बनने से भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र जाप और जलाभिषेक का महत्व कई गुना बढ़ जाएगा। मान्यता है कि इन शुभ योगों में की गई शिव आराधना से मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।
सावन सोमवार का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान पूरे श्रद्धाभाव से किए गए सोमवार व्रत और शिव पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। भक्त शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग और सफेद पुष्प अर्पित करते हैं तथा 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें स्वीकार किया। इसी कारण अविवाहित युवक-युवतियां मनचाहे जीवनसाथी की कामना से सावन सोमवार का व्रत रखते हैं। वहीं विवाहित महिलाएं वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत करती हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सावन सोमवार का व्रत करने और शिव मंत्रों का जाप करने से कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है तथा राहु-केतु के अशुभ प्रभावों को कम करने में भी सहायता मिलती है।
मंगला गौरी व्रत का भी रहेगा विशेष महत्व
सावन का महीना केवल भगवान शिव ही नहीं, बल्कि माता पार्वती की उपासना के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। वर्ष 2026 में सावन के दौरान चार मंगला गौरी व्रत पड़ेंगे। यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा अखंड सौभाग्य, पारिवारिक सुख और समृद्धि की कामना से रखा जाता है।
कांवड़ यात्रा और रुद्राभिषेक की परंपरा
सावन के महीने में देशभर में कांवड़ यात्रा का भी विशेष महत्व रहता है। लाखों शिव भक्त पवित्र नदियों से गंगाजल लाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया रुद्राभिषेक भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है और इससे भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सावन का यह पावन महीना भक्ति, संयम, तप और शिव आराधना का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में यदि श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाए तो जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने की मान्यता है।
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