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धर्म-अध्यात्म
सावन पुत्रदा एकादशी आज जानें व्रत कथा पूजा विधि और विष्णु आराधना का महत्व
nidhi
23 Aug 2026 9:56 AM IST

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श्रावण पुत्रदा एकादशी पर विष्णु सहस्रनाम पाठ का महत्व
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली पुत्रदा एकादशी को बेहद शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से संतान सुख, परिवार की खुशहाली और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। वर्ष 2026 में श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त, रविवार को रखा जा रहा है।
इस एकादशी को पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
विष्णु सहस्रनाम पाठ का महत्व
श्रावण पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के सहस्र नामों का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विष्णु सहस्रनाम का जाप करने से मन को शांति मिलती है और भक्त को श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है।
विष्णु सहस्रनाम में भगवान विष्णु के हजार नामों का वर्णन किया गया है। भक्त मानते हैं कि श्रद्धा और भक्ति के साथ इसका पाठ करने से मानसिक तनाव दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि का वातावरण बनता है।
पुत्रदा एकादशी की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार राजा महीजित एक धर्मात्मा राजा थे, लेकिन उन्हें संतान सुख प्राप्त नहीं था। राजा और उनकी प्रजा इस समस्या से चिंतित थे। तब ऋषि लोमेश ने उन्हें श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।
राजा ने विधि-विधान से यह व्रत किया और भगवान विष्णु की आराधना की। व्रत के प्रभाव से उन्हें एक योग्य पुत्र की प्राप्ति हुई। इसी कारण इस एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है।
पूजा का शुभ समय और विधि
श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 में 23 अगस्त को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 23 अगस्त से शुरू होकर 24 अगस्त की सुबह तक रहेगी।
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। पूजा में पीले वस्त्र, तुलसी दल, फल और दीप अर्पित करने की परंपरा है।
पूजा के दौरान भक्तों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
भगवान विष्णु का ध्यान और मंत्र जाप करें।
विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
तुलसी पत्र अर्पित करें।
जरूरतमंद लोगों को दान करें।
सात्विक भोजन और विचारों का पालन करें।
व्रत और दान का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुत्रदा एकादशी पर दान करने का भी विशेष महत्व है। इस दिन अन्न, वस्त्र और जरूरत की वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है।
कई श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु से संतान की लंबी उम्र, परिवार की सुख-शांति और जीवन में सफलता की कामना करते हैं।
आध्यात्मिक दृष्टि से खास दिन
श्रावण पुत्रदा एकादशी केवल संतान प्राप्ति की कामना तक सीमित नहीं मानी जाती, बल्कि यह आत्मिक शुद्धि और भगवान विष्णु की भक्ति का भी पर्व है। श्रद्धालु इस दिन संयम, ध्यान और पूजा-पाठ के माध्यम से आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
मान्यता और आस्था के अनुसार, इस पवित्र दिन भगवान विष्णु की आराधना और विष्णु सहस्रनाम का पाठ जीवन में सकारात्मक बदलाव और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
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