- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- धर्म-अध्यात्म
- /
- Saphala Ekadashi: व्रत...
धर्म-अध्यात्म
Saphala Ekadashi: व्रत से मिलता है राजयोग, जानें राजा महिष्मान के पुत्र की पौराणिक कथा
Harrison
11 Dec 2025 6:44 PM IST

x
Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि अत्यंत शुभ और पवित्र मानी जाती है। वर्ष भर में कुल 24 एकादशियाँ आती हैं, जिनमें से सफला एकादशी विशेष फलदायी और मनोकामना पूर्ण करने वाली मानी गई है। यह एकादशी मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष में आती है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा से करने पर जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और साधक को सौभाग्य, सफलता और राजयोग प्राप्त होता है। वर्ष 2025 में सफला एकादशी का पर्व 27 दिसंबर 2025 को मनाया जाएगा।
सफला एकादशी: विशेष क्यों है?
भक्ति ग्रंथों में कहा गया है कि सफला एकादशी पर व्रत रखने से अधूरे कार्य पूरे होते हैं और व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भगवान विष्णु इस एकादशी के अधिष्ठाता देवता माने जाते हैं। जो व्यक्ति इस व्रत का पालन करता है, उसे भगवान की कृपा सहज प्राप्त होती है।
शास्त्रों में वर्णित है कि सफला एकादशी का व्रत जीवन को निष्फलता से उबारकर सफल बनाता है। इसी कारण इसका नाम "सफला" अर्थात “सफलता प्रदान करने वाली” एकादशी रखा गया है।
पौराणिक कथा: राजा महिष्मान के पुत्र का परिवर्तन
सफला एकादशी की महिमा से जुड़ी सर्वाधिक प्रसिद्ध कथा राजा महिष्मान और उनके चार पुत्रों की है।
राजा महिष्मान एक धर्मनिष्ठ और उदार शासक थे। उनके चार पुत्रों में सबसे छोटा पुत्र लुंपक अत्यंत दुर्गुणों से भरा हुआ था। शराब, जुआ, चोरी और हिंसा उसके स्वभाव का हिस्सा थे। राज्य के लोग उससे भय खाते थे और राजा भी उसके आचरण से दुखी थे। अंततः राजा ने राज्य की मर्यादा बनाए रखने के लिए उसे राज्य से बहिष्कृत कर दिया।
वन में कठोर जीवन और नई शुरुआत
राज्य से निष्कासित होने के बाद लुंपक जंगल में जाकर रहने लगा। वहाँ भी उसने चोरी की आदत नहीं छोड़ी और रात के समय यात्रियों को लूटता रहा। लेकिन समय के साथ उसके कर्मों का फल उसे मिलने लगा।
एक बार अत्यधिक ठंड में वह बेहोश होकर एक पेड़ के नीचे गिर पड़ा। यह वही पेड़ था जो भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना जाता है। संयोग से वह दिन सफला एकादशी का ही था। अगले दिन ब्राह्ममुहूर्त में जब लुंपक की चेतना लौटी, तो उसने स्वयं को विष्णु के पवित्र वृक्ष के नीचे पाया। उसे अपने जीवन के पाप याद आए और हृदय में गहरा पश्चाताप जाग उठा। उसके भीतर परिवर्तन की शुरुआत हुई।
भक्ति और प्रायश्चित
उसने उसी दिन उपवास रखा, यद्यपि अनजाने में ही सही। उसने भगवान विष्णु के लिए फल और पत्तों से एक छोटा-सा भोग तैयार किया और हृदय से क्षमा मांगी।
विष्णु भगवान उसकी इस अनजानी भक्ति और सच्चे पश्चाताप से प्रसन्न हुए। कहा जाता है कि उसी रात भगवान ने उसे दिव्य दर्शन देकर उसके सभी पाप क्षमा कर दिए और उसे पुनः सुशील, विवेकवान और धार्मिक जीवन जीने की शक्ति प्रदान की।
इसके बाद राजा महिष्मान ने अपने पुत्र को वापस राज्य में बुलाया और उसे उत्तराधिकारी घोषित किया। बाद में वह एक सफल और न्यायप्रिय राजा बना। इसीलिए सफला एकादशी को “राजयोग प्रदान करने वाली” एकादशी कहा जाता है।
सफला एकादशी व्रत विधि
सफला एकादशी का व्रत नियमपूर्वक किया जाए तो अत्यंत शुभ माना जाता है।
प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें।
पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप-दीप अर्पित करें।
पूरे दिन व्रत रखें, फलाहार या जलाहार किया जा सकता है।
रात्रि में जागरण कर हरि-नाम का कीर्तन करें।
अगले दिन द्वादशी तिथि पर जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र और दान दें।
व्रत के लाभ
मानसिक शांति और आत्मबल की प्राप्ति
ग्रहदोष और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति
आर्थिक बाधाओं का समाप्त होना
पितर और देवताओं की कृपा
सुख-समृद्धि और सफलता में वृद्धि
राजयोग प्राप्ति का शुभ अवसर
निष्कर्ष
सफला एकादशी केवल व्रत का दिन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और जीवन परिवर्तन का अवसर है। राजा महिष्मान के पुत्र की कथा यह दर्शाती है कि सच्चे हृदय से किया गया प्रायश्चित और भक्ति किस प्रकार मनुष्य के जीवन को नई दिशा दे सकती है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत व्यक्ति के जीवन में सफलता, सौभाग्य और शांति का मार्ग प्रशस्त करता है।
Tagsसफला एकादशीव्रतराजयोगराजा महिष्मानपुत्रपौराणिक कथाSaphala EkadashifastRaj YogaKing Mahishmansonmythological storyजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





