- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- धर्म-अध्यात्म
- /
- Sakat Chauth 2026:...

x
Religion Spirituality. धर्म अध्यात्म : सकल हिंदू धर्म में 6 जनवरी 2026 को सकट चौथ या तिलकुट चौथ मनाया जाएगा। यह दिन विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा और संकटमोचन हनुमान की भक्ति के लिए माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन की पूजा में कुछ खास सामग्रियों का होना बेहद जरूरी है। इन सामग्रियों के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
सकट चौथ का महत्व मुख्य रूप से यह है कि इस दिन की गई पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है, रोग-व्याधि दूर होते हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है। विशेष रूप से महिलाएं इस दिन का व्रत करती हैं और भगवान गणेश के साथ-साथ हनुमान जी और अन्य देवताओं की भी आराधना करती हैं।
पूजा की सामग्री में सबसे महत्वपूर्ण है तिलकुट। तिलकुट या तिल और गुड़ से बनी मिठाई को भगवान को अर्पित किया जाता है। इसके अलावा, लाल और पीले रंग के फूल, कुमकुम, हल्दी, चावल, अक्षत (अखरोट या चावल के दाने) और नारियल पूजा में जरूरी हैं। दीपक और घी भी पूजा का अहम हिस्सा हैं, जिससे पूजा स्थल पवित्र और शुभ बनता है।
भक्त इस दिन विशेष रूप से भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र का पूजन करते हैं। पूजा में फल, especially केले, आम, नारियल और अन्य मौसमी फल अर्पित किए जाते हैं। कुछ स्थानों पर महिलाएं तिलकुट और गुड़ से बने पकवानों को प्रसाद के रूप में बांटती हैं। इसके अलावा, पूजा स्थल पर सफाई और पवित्रता का ध्यान रखना आवश्यक है।
सकट चौथ के दिन किए जाने वाले व्रत और पूजा का उद्देश्य मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि पूजा की सामग्री पूरी करने से पूजा का प्रभाव बढ़ता है और श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है। इस दिन की गई आराधना से परिवार में सौहार्द बढ़ता है और सभी संकट दूर होते हैं।
सकल हिंदू परंपरा में यह भी कहा गया है कि सकट चौथ की पूजा सुबह जल्दी उठकर करनी चाहिए। पूजा के दौरान मंत्रों का पाठ, हनुमान चालीसा और गणेश स्तुति का पाठ करना शुभ माना जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं इस दिन फलाहार या जल-भोजन कर सकती हैं, और दिनभर ध्यान व भक्ति में लगी रहती हैं।
इस प्रकार, 6 जनवरी 2026 को मनाए जाने वाले सकट चौथ की पूजा में तिलकुट, फल, फूल, नारियल, दीपक, हल्दी-कुमकुम और अन्य पारंपरिक सामग्री का होना अनिवार्य है। ये सभी चीजें पूजा को पूर्ण बनाती हैं और श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती हैं।
Next Story





