धर्म-अध्यात्म

Vijaya Ekadashi के दिन करें इस कथा का पाठ, मिलेगा मनचाहा फल

Tara Tandi
24 Feb 2025 3:50 PM IST
Vijaya Ekadashi के दिन करें इस कथा का पाठ, मिलेगा मनचाहा फल
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Vijaya Ekadashi ज्योतिष न्यूज़ : सनातन धर्म में कई सारे व्रत त्योहार पड़ते हैं और सभी का अपना महत्व होता है लेकिन एकादशी व्रत को बेहद ही खास माना जाता है जो कि भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन भक्त दिनभर उपवास रखकर श्री हरि की विधिवत पूजा करते हैं। एकादशी का व्रत हर माह में दो बार पड़ता है ऐसे साल में कुल 24 एकादशी व्रत किए जाते हैं।
पंचांग के अनुसार अभी फाल्गुन मास चल रहा है और इस माह पड़ने वाला एकादशी व्रत विजया एकादशी के नाम से जाना जा रहा है इस दिन पूजा पाठ और व्रत करने से हर काम में सफलता मिलती है और बाधाएं दूर हो जाती हैं इस बार विजया एकादशी का व्रत 24 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा पाठ के साथ ही अगर ​विजया एकादशी व्रत कथा का पाठ किया जाए तो विशेष लाभ की प्राप्ति होती है और व्रत पूजा भी सफल हो जाती है, तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं विजया एकादशी व्रत कथा।
विजया एकादशी व्रत कथा—
एक बार धर्मराज युधिष्टिर ने भगवान श्री कृष्ण से आग्रह किया कि फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष में किस नाम की एकादाशी होती है? कृपया बताएं. इस पर भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष में विजया एकादशी होती है. ये व्रत बहुत ही पवित्र और पापनाशक है. ये एकादशी राजाओं को विजय प्रदान करती है. ब्रह्म जी ने नारद मुनि को विजया एकादशी के बारे में बताया था वो मैं आपको बताता हूं.
कथा के अनुसार, त्रेता युग में भगवान राम अपनी पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ 14 सालों के लिए वन चले गए और वहीं रहने लगे. वन में रहने के दौरान एक दिन रावण चालकी से माता सीता का हरण कर उनको अपने साथ लंका ले गया. माता सीता के हरण के बाद भगवान राम व्याकुल हो उठे. इसके बाद वो वन में अनुज लक्ष्मण के साथ माता सीता को खोजने लगे.
कुछ दूर जाने पर भगवान राम को जटायू मिले. इसके बाद भगवान ने वन के भीतर कबन्ध नामक राक्षस का वध किया. फिर उनकी वानर राज सुग्रीव से मित्रता हुई. इसके बाद माता सीता की खोज के लिए वानरों की सेना एकत्रित की गई. हनुमान जी लंका गए, जहां अशोक वाटिका में उन्हें माता सीता नजर आईं. अशोक वाटिका में हनुमाज जी ने माता सीता के दर्शन किए.
इसके बाद माता सीता ने उन्हें पहचान स्वरूप एक मुद्रिका दी. इसके बाद हनुमान जी ने लंका को जलाकर तहस नहस कर दिया और वापस लौटकर भगवान राम को माता सीता का हाल बताया. इसके बाद लंका पर आक्रमण करने का फैसला किया गया, लेकिन सबसे बड़ी समस्या विशाल समुद्र को पार करने की थी. इस पर सब विचार करने लगे. एक दिन लक्ष्मण जी ने बताया कि कुछ दूर पर वकदालभ्य ऋषि का आश्रम है. वो हमें समुद्र को पार करने का मार्ग बता सकते हैं.
इसके बाद भगवाम राम वकदालभ्य ऋषि के आश्रम में गए और उनको प्रणाम करके आने की वजह बताई. तब ऋषि ने भगवान से विजया एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु के विधि-विधान से पूजा करने की बात कही. उन्होंने भगवान राम से कहा कि ये व्रत आपको अपने भाई, सेनापतियों और सहयोगियों के साथ रखना होगा. उन्होंने विजया एकादशी व्रत की विधि भी बताई.
इसके बाद भगवान राम अपनी वानर सेना के पास वापस लौट आए और विधि पूर्वक फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष को विजया एकदशी का व्रत रखा. साथ ही पूरे विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की. व्रत के प्रभाव से वानर सेना ने समुद्र पर सेतु बनाया और उसे पार कर लंका पहुंच गई, जहां भगवान राम से रावण का अंत कर उस पर विजय प्राप्त की और सीता अशोक वाटिका से मुक्त हो गईं.
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