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मंत्र का शुभ उच्चारण
धर्म : रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी बांधते समय एक विशेष मंत्र का उच्चारण करने से इस पर्व की शुभता और बढ़ जाती है।
राखी बांधते समय मुख्य रूप से इस मंत्र का जाप किया जाता है—
"येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥"
मंत्र का अर्थ
इस मंत्र का अर्थ है कि जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षा सूत्र, तुम सदैव मेरी और मेरे भाई की रक्षा करना और कभी विचलित मत होना।
राखी बांधने की सही विधि
सबसे पहले भाई को साफ स्थान पर बैठाएं।
भाई के माथे पर रोली और अक्षत से तिलक करें।
भगवान का स्मरण करते हुए दीपक जलाएं।
भाई की कलाई पर राखी बांधते समय ऊपर दिए गए मंत्र का उच्चारण करें।
इसके बाद भाई की आरती उतारें और मिठाई खिलाएं।
भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसकी रक्षा का संकल्प लेता है।
मंत्र पढ़ने का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंत्रों के उच्चारण से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। रक्षाबंधन पर यह मंत्र भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और सुरक्षा की भावना को मजबूत करने का प्रतीक माना जाता है।
किस दिशा में बैठकर बांधें राखी?
मान्यताओं के अनुसार, राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है। वहीं बहन को भी शुभ भाव और श्रद्धा के साथ पूजा करनी चाहिए।
रक्षाबंधन केवल एक धागे का पर्व नहीं बल्कि प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक है। मंत्र के साथ राखी बांधने से इस परंपरा का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
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