धर्म-अध्यात्म

Mahadev के पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ, सुख और समृद्धि की दिशा में बड़ा कदम

Tara Tandi
27 April 2025 7:34 PM IST
Mahadev के पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ, सुख और समृद्धि की दिशा में बड़ा कदम
x
Panchakshar Stotra ज्योतिष न्यूज़ : शिव के पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' की महिमा के बारे में आपने खूब सुना होगा। यह बहुत ही सरल और प्रभावशाली मंत्र बताया जाता है और हर तरह से लोगों को लाभ पहुंचाने वाला मंत्र है। शिव के इस मंत्र के जाप से पृथ्वी, अग्नि, जल, आकाश और वायु सभी पांचों तत्वों को नियंत्रित किया जा सकता है। यह मंत्र मुक्तिदायक माना जाता है और सभी वेदों का सार है। इस मंत्र का प्रत्येक अक्षर अपने आप में बहुत शक्तिशाली है। इस पंचाक्षर मंत्र के प्रत्येक अक्षर की महिमा का गुणगान करने के लिए जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने पंचाक्षर स्तोत्र की रचना की। इस स्तोत्र में पंचाक्षर (न, म, शि, व, य) की शक्ति का वर्णन किया गया है।
इस पंचाक्षर स्तोत्र के मंत्रों में पंचानन यानी पंचमुखी महादेव की सभी शक्तियां समाहित हैं। अगर इस स्तोत्र का सच्चे मन से नियमित पाठ किया जाए तो असंभव कार्य भी संभव हो सकते हैं। आप इसकी शुरुआत महाशिवरात्रि के दिन से कर सकते हैं। इस बार महाशिवरात्रि 1 मार्च 2022, मंगलवार को पड़ रही है।
पंचाक्षर स्तोत्र
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय, नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै 'न' काराय नम: शिवाय.
मन्दाकिनी सलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय, मन्दारपुष्पबहुपुष्प सुपूजिताय तस्मै 'म' काराय नम: शिवाय.
शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय, श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै 'शि' काराय नम: शिवाय.
वशिष्ठकुम्भोद्भव गौतमार्य मुनीन्द्रदेवार्चित शेखराय, चन्द्रार्क वैश्वानरलोचनाय तस्मै 'व' काराय नम: शिवाय.
यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय, दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै 'य' काराय नम: शिवाय.
पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेत् शिव सन्निधौ, शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते.
पंचाक्षर स्तोत्र का महत्व
कहते हैं कि इस स्तोत्र का भक्ति भाव से पाठ करने से शिव जी बहुत प्रसन्न होते हैं। इससे व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और वह इस संसार में निर्भय होकर रहता है। यह स्तोत्र व्यक्ति की अकाल मृत्यु को टाल सकता है। साथ ही इसे नियमित रूप से पढ़ने से काल सर्प दोष का प्रभाव भी दूर होता है। शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करते समय कपूर और इत्र का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।
Next Story