- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- धर्म-अध्यात्म
- /
- सर्वपितृ अमावस्या पर 3...
धर्म-अध्यात्म
सर्वपितृ अमावस्या पर 3 दुर्लभ ग्रहों का महासंयोग, जानें राशियों पर असर
nidhi
10 Oct 2026 9:47 AM IST

x
सर्वपितृ अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 10 अक्टूबर, शनिवार को मनाया जा रहा है। इस बार सर्वपितृ अमावस्या के साथ शनिश्चरी अमावस्या का संयोग भी बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गजछाया योग और हस्त नक्षत्र का संयोग भी विशेष महत्व रखता है। पितरों के श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य के लिए इस दिन को महत्वपूर्ण माना गया है।
ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर इस अवधि में सूर्य, शनि और शुक्र की स्थिति को लेकर भी चर्चा हो रही है। मान्यता है कि ग्रहों की स्थिति का प्रभाव व्यक्ति के करियर, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक जीवन और मानसिक स्थिति से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, ग्रहों के आधार पर भविष्य में होने वाली घटनाओं की निश्चितता वैज्ञानिक रूप से स्थापित नहीं है। इसलिए राशिफल को सामान्य ज्योतिषीय मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए।
सर्वपितृ अमावस्या का धार्मिक महत्व
सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है। इस तिथि पर उन पूर्वजों के लिए भी श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि परिवार को ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर नहीं हो पाया हो। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन पितरों का स्मरण करने, जरूरतमंदों को भोजन कराने और सामर्थ्य के अनुसार दान देने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
शनिवार को अमावस्या पड़ने के कारण इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण करने के साथ शनिदेव की पूजा करने की परंपरा भी है। श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-पाठ और दान करते हैं।
ग्रहों के संयोग से राशियों पर क्या असर?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन का प्रभाव सभी राशियों के लिए एक जैसा नहीं माना जाता। कुछ राशियों के लिए कार्यों की योजना बनाने और पुराने अधूरे काम पूरे करने का समय अनुकूल बताया जा रहा है, जबकि कुछ राशियों को खर्च और फैसलों के मामले में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
मेष राशि: इस राशि के जातकों को आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखने की सलाह दी जाती है। अनावश्यक खर्चों से बचें और कामकाज से जुड़े फैसले सोच-समझकर लें।
वृषभ राशि: करियर और कारोबार से जुड़े मामलों में नई योजनाओं पर ध्यान देने का समय माना जा रहा है। अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से पूरा करना लाभकारी हो सकता है।
मिथुन राशि: मित्रों और सहकर्मियों के साथ बातचीत में संयम रखें। आर्थिक मामलों में जल्दबाजी करने से बचें और अपने खर्चों की समीक्षा करें।
कर्क राशि: पारिवारिक जिम्मेदारियों पर ध्यान देना जरूरी रहेगा। कार्यक्षेत्र में मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने के लिए धैर्य और योजनाबद्ध तरीके से काम करें।
सिंह राशि: परिवार का सहयोग मिलने की उम्मीद से जुड़े ज्योतिषीय संकेत बताए जा रहे हैं। अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाते समय दूसरों की सलाह पर भी ध्यान दें।
कन्या राशि: अधूरे कार्यों को व्यवस्थित करने और आर्थिक योजनाओं की समीक्षा करने के लिए समय उपयोगी माना जा रहा है। निवेश से पहले सभी पहलुओं पर विचार करें।
तुला राशि: सामाजिक संपर्क बढ़ाने और रिश्तों में सामंजस्य बनाए रखने पर ध्यान दें। कार्यक्षेत्र में नए अवसरों के लिए अपनी तैयारी मजबूत रखें।
वृश्चिक राशि: पारिवारिक और आर्थिक मामलों में सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जाती है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले संबंधित जानकारी जुटाएं।
धनु राशि: धार्मिक कार्यों और आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर रुझान बढ़ सकता है। नौकरी और कारोबार में नियमित प्रयास जारी रखना जरूरी रहेगा।
मकर राशि: लंबे समय से अटके कामों को पूरा करने के लिए योजना बनाएं। कार्यक्षेत्र में अनुभवी लोगों की सलाह उपयोगी हो सकती है।
कुंभ राशि: आय और खर्च के बीच संतुलन बनाए रखने पर ध्यान दें। किसी नई योजना में आगे बढ़ने से पहले उसके जोखिम और लाभ समझें।
मीन राशि: निजी जीवन और कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की जरूरत होगी। धैर्य के साथ किए गए प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करें।
इन राशिफल संकेतों को निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक परिणाम व्यक्ति की परिस्थितियों, प्रयासों और निर्णयों पर निर्भर करते हैं।
श्राद्ध, तर्पण और दान का विशेष महत्व
सर्वपितृ अमावस्या पर प्रचलित धार्मिक परंपराओं के अनुसार स्नान के बाद पितरों का स्मरण कर तर्पण किया जाता है। इसके लिए जल, काले तिल और कुश का उपयोग किया जाता है। परिवार की परंपरा के अनुसार श्राद्ध कर्म, भोजन दान और जरूरतमंदों की सहायता भी की जाती है।
कुल मिलाकर, सर्वपितृ अमावस्या पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और परिवार की परंपराओं को निभाने का अवसर है। शनिश्चरी अमावस्या और अन्य ज्योतिषीय संयोगों के कारण इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार पूजा-पाठ कर सकते हैं और दैनिक जीवन में जिम्मेदारी, संयम तथा विवेक को प्राथमिकता दे सकते हैं।
Next Story





