धर्म-अध्यात्म

सावन में दुर्लभ संयोग, 10 अगस्त को ही प्रदोष व्रत और कांवड़ जलाभिषेक

Ratna Netam
4 Aug 2026 8:36 PM IST
सावन में दुर्लभ संयोग, 10 अगस्त को ही प्रदोष व्रत और कांवड़ जलाभिषेक
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धर्म :सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पूरे महीने में शिवभक्त व्रत, पूजा, अभिषेक और कांवड़ यात्रा के माध्यम से भोलेनाथ की उपासना करते हैं। इस वर्ष सावन के अंतिम चरण में एक विशेष धार्मिक संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार, सावन का सोम प्रदोष व्रत 10 अगस्त 2026, सोमवार को रखा जाएगा। खास बात यह है कि इस बार त्रयोदशी तिथि का लोप हो रहा है, इसलिए प्रदोष व्रत, सावन त्रयोदशी और कांवड़ का जलाभिषेक तीनों का महत्व एक ही दिन पर आ गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस विशेष संयोग के कारण 10 अगस्त का दिन शिवभक्तों के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जा रहा है।
श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की शुरुआत के साथ कई महत्वपूर्ण तिथियां पड़ रही हैं। 5 अगस्त, बुधवार को श्रावण कृष्ण सप्तमी तिथि रहेगी। इस दिन शीतला सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि रात्रि 8 बजकर 43 मिनट तक रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इसी दिन सुबह 9 बजकर 24 मिनट तक भद्रा का प्रभाव रहेगा, जबकि गंडमूल योग रात 9 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि शीतला सप्तमी के दिन माता शीतला की पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
6 अगस्त, गुरुवार को श्रावण कृष्ण अष्टमी तिथि शाम 6 बजकर 53 मिनट तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि आरंभ होगी। वहीं 7 अगस्त, शुक्रवार को नवमी तिथि शाम 4 बजकर 38 मिनट तक रहेगी और उसके बाद दशमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इन तिथियों के दौरान श्रद्धालु नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक करते रहेंगे।
सावन मास की कामिका एकादशी इस वर्ष 9 अगस्त, रविवार को मनाई जाएगी। हालांकि 8 अगस्त को दोपहर 2 बजे के बाद एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी, लेकिन उदया तिथि के आधार पर व्रत 9 अगस्त को रखा जाएगा। इस दिन प्रातः 11 बजकर 6 मिनट तक एकादशी तिथि रहेगी और उसके बाद द्वादशी प्रारंभ हो जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि कामिका एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है।
इस वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण संयोग 10 अगस्त, सोमवार को बन रहा है। इस दिन प्रातः 8 बजकर 1 मिनट तक द्वादशी तिथि रहेगी, जिसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होकर देर रात 4 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि लग जाएगी। चूंकि अगले दिन उदया तिथि में त्रयोदशी नहीं रहेगी, इसलिए पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि का लोप माना जा रहा है। इसी कारण सोम प्रदोष व्रत, सावन त्रयोदशी और कांवड़ यात्रा का समापन एक ही दिन किया जाएगा।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, सावन में कांवड़ लेकर आने वाले शिवभक्त त्रयोदशी के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। इस बार त्रयोदशी के लोप के कारण सभी श्रद्धालु 10 अगस्त को ही अपने कांवड़ का पवित्र जल शिवलिंग पर अर्पित करेंगे। माना जाता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी दिन सावन की कांवड़ यात्रा का भी समापन हो जाएगा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 10 अगस्त को प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 5 मिनट से रात 9 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी महाराज की विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। श्रद्धालु इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद चंदन और अक्षत अर्पित कर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप कर सकते हैं। प्रदोष व्रत की कथा सुनने और दीपदान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के सोम प्रदोष व्रत का फल सामान्य प्रदोष व्रत की तुलना में कई गुना अधिक माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन सच्ची श्रद्धा से भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्तों के जीवन से कष्ट दूर होते हैं, आर्थिक समस्याओं में राहत मिलती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस वर्ष त्रयोदशी तिथि के लोप के कारण बना यह दुर्लभ संयोग शिवभक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है, इसलिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु 10 अगस्त को मंदिरों में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करेंगे।
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