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धर्म-अध्यात्म
Rama Ekadashi , 17 अक्टूबर को है व्रत, जानें विधि, कथा और लाभ
Harrison
16 Oct 2025 9:26 PM IST

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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी विष्णु भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस व्रत को रखने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साल 2025 में रमा एकादशी का व्रत 17 अक्टूबर, शुक्रवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है।
यह व्रत खासतौर पर दीपावली से पहले आता है और इसलिए इसे धन और समृद्धि से भी जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजन करने से जीवन में सुख, शांति और वैभव की प्राप्ति होती है।
रमा एकादशी 2025: व्रत तिथि और शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ: 16 अक्टूबर 2025, गुरुवार को रात 09:15 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 17 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को रात 07:55 बजे
व्रत पारण का समय (द्वादशी): 18 अक्टूबर को सुबह 06:30 से 08:45 तक (स्थानीय समय के अनुसार)
रमा एकादशी व्रत की पूजा विधि
व्रती को व्रत से एक दिन पहले सात्विक भोजन करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
घर के पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
पीले फूल, तुलसी दल, धूप-दीप, और पंचामृत से पूजा करें।
भगवान विष्णु को पीले वस्त्र और भोग में फल, माखन-मिश्री, पंचामृत आदि अर्पित करें।
दिनभर व्रत रखें और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।
रात्रि में जागरण करें और भजन-कीर्तन करें।
अगले दिन द्वादशी को ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराकर दान दें और व्रत का पारण करें।
रमा एकादशी व्रत कथा (संक्षेप में)
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में मुचुकुंद नाम के एक राजा थे जिनकी पुत्री चंद्रभागा का विवाह एक पुण्यात्मा राजकुमार से हुआ था। चंद्रभागा रमा एकादशी का व्रत करती थी। एक बार उसका पति उस दिन भोजन करने लगा, लेकिन चंद्रभागा ने व्रत का महत्व बताते हुए उसे भी उपवास कराया। राजकुमार ने पूरे नियमों से रमा एकादशी का पालन किया, जिससे उसके सारे पाप नष्ट हो गए और अंत में वह विष्णु लोक को प्राप्त हुआ।
रमा एकादशी के विशेष उपाय
इस दिन गरीबों को अन्न और वस्त्र दान करें, जिससे मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
तुलसी दल से भगवान विष्णु की पूजा करें, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को अति प्रिय है।
शाम को घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं, इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
पीले फल और मिठाई का दान करने से धन लाभ होता है।
रमा एकादशी के मंत्र
विष्णु मंत्र:
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"
लक्ष्मी मंत्र:
"ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः"
इन मंत्रों का जाप कम से कम 108 बार अवश्य करें।
रमा एकादशी का व्रत न सिर्फ आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जीवन में धन, समृद्धि और शांति भी लेकर आता है। व्रती को पूरे नियम और श्रद्धा से व्रत रखना चाहिए और अगले दिन व्रत का विधिपूर्वक पारण करना चाहिए। यह व्रत दीपावली से पहले होने के कारण देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने का एक उत्तम अवसर भी माना जाता है।
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