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- इन राशियों पर बरसेगा...

Religion धर्म : ज्योतिष शास्त्र में राहु को एक छाया ग्रह माना गया है, जिसका प्रभाव व्यक्ति की सोच, समझ और निर्णय क्षमता पर पड़ता है। वहीं मंगल ग्रह को साहस, ऊर्जा और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का प्रतीक माना जाता है। जब ये दोनों ग्रह एक विशेष स्थिति में आते हैं, तो इसका प्रभाव जीवन के विभिन्न पहलुओं पर देखा जाता है। इसी क्रम में राहु और मंगल की युति को सामान्यतः मिश्रित परिणाम देने वाला माना जाता है, हालांकि इसका वास्तविक असर कुंडली में मौजूद अन्य ग्रहों की स्थिति पर भी निर्भर करता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, वर्तमान समय में राहु ग्रह वट पूर्णिमा के एक दिन बाद नक्षत्र परिवर्तन कर रहे हैं। इस दौरान राहु के धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करने की स्थिति बन रही है, जिससे एक विशेष प्रकार का योग निर्मित होता है। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, राहु के धनिष्ठा नक्षत्र में गोचर करने से अंगारक योग जैसी स्थिति बन सकती है। यह योग तब बनता है जब राहु और मंगल की ऊर्जा एक साथ सक्रिय होती है।
राहु को जहां विस्तार और भ्रम का कारक माना जाता है, वहीं मंगल को ऊर्जा और गति का प्रतीक माना जाता है। जब ये दोनों मिलते हैं, तो ऊर्जा का विस्तार बढ़ जाता है और इसे ज्योतिष में अंगारक योग कहा जाता है। यह स्थिति कई बार व्यक्ति के जीवन में तीव्र घटनाओं, निर्णयों में जल्दबाजी और मानसिक दबाव को भी दर्शाती है। कुछ राशियों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जबकि कुछ के लिए यह अवसर भी लेकर आता है।
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, अंगारक योग को एक ऐसी स्थिति माना जाता है जिसमें ऊर्जा का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है। इसका प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और व्यवहार पर देखा जा सकता है। इस दौरान व्यक्ति में क्रोध, जल्दबाजी या अस्थिरता जैसी प्रवृत्तियां बढ़ सकती हैं, इसलिए संतुलन बनाए रखना आवश्यक माना जाता है।
राहु के प्रभाव को शांत करने के लिए कुछ उपाय भी बताए गए हैं। कहा जाता है कि आलस्य से बचना चाहिए, क्योंकि आलस्य के कारण निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। साथ ही स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए और नियमित रूप से भगवान शिव को जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा राहु से संबंधित उपायों में सूखा नारियल, कोयला आदि का दान या प्रवाह करना भी परंपरागत रूप से बताया गया है। तिल का दीपक जलाना भी राहु के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है।
कुल मिलाकर, राहु और मंगल की युति से बनने वाला अंगारक योग ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण स्थिति मानी जाती है, जिसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रूपों में देखा जा सकता है। सही समझ, संयम और उपायों के माध्यम से इसके प्रभाव को संतुलित किया जा सकता है।





