धर्म-अध्यात्म

30 दिसंबर को पौष माह की Putrada Ekadashi, संतान सुख के लिए विशेष व्रत

Harrison
29 Dec 2025 8:51 PM IST
30 दिसंबर को पौष माह की Putrada Ekadashi,  संतान सुख के लिए विशेष व्रत
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Religion Spirituality ,धर्म अध्यात्म : 30 दिसंबर को पौष माह की पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार यह एकादशी भगवान लक्ष्मी नारायण को समर्पित होती है। इस व्रत का विशेष महत्व संतान सुख, वंश वृद्धि और पारिवारिक समृद्धि से जुड़ा माना गया है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से संतान से जुड़ी समस्याओं का समाधान होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

पुत्रदा एकादशी का नाम ही इसके महत्व को दर्शाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से संतान की प्राप्ति होती है और वंश आगे बढ़ता है। विशेष रूप से निसंतान दंपत्ति इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से दंपत्ति को संतान सुख की प्राप्ति होती है और परिवार में खुशहाली आती है।
इस दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा में भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, फल, फूल और तुलसी दल अर्पित किए जाते हैं। माता लक्ष्मी के साथ लक्ष्मी नारायण की संयुक्त पूजा का विशेष महत्व होता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पौष माह की पुत्रदा एकादशी पर किया गया व्रत कई जन्मों के पुण्य के समान फल देता है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के बाल रूप को समर्पित है और संतान सुख की कामना के लिए इसका पाठ किया जाता है। पूजा के समय श्रद्धा और विश्वास के साथ इस स्तोत्र का पाठ करने से मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है।
पुत्रदा एकादशी केवल संतान प्राप्ति तक सीमित नहीं मानी जाती, बल्कि इसे सुख, सौभाग्य और पारिवारिक संतुलन से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने से घर में सकारात्मक वातावरण बनता है और जीवन में स्थिरता आती है। कई श्रद्धालु इस दिन दान-पुण्य भी करते हैं, जिससे पुण्य फल में वृद्धि होती है।
इस व्रत में अन्न का त्याग किया जाता है और फलाहार या निर्जला व्रत रखा जाता है। व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि को किया जाता है। मान्यता है कि व्रत का सही तरीके से पालन करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
धार्मिक दृष्टि से पौष माह को तप और साधना का समय माना जाता है। इस माह की एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। 30 दिसंबर को पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी को श्रद्धालु विशेष श्रद्धा के साथ मनाते हैं। मंदिरों में इस अवसर पर विशेष पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जाता है।
इस प्रकार पौष माह की पुत्रदा एकादशी न केवल धार्मिक बल्कि पारिवारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। संतान सुख, वंश वृद्धि और पारिवारिक समृद्धि की कामना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना गया है।
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