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जून माह में पड़ने वाले प्रदोष व्रत, भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व

Religion Desk, धर्म डेस्क : प्रत्येक माह में दो बार प्रदोष व्रत रखा जाता है, जो हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक महादेव की पूजा और व्रत करने से साधक के सभी भय दूर होते हैं और जीवन में आने वाले कष्टों से मुक्ति मिलती है।
प्रदोष व्रत का विशेष महत्व प्रदोष काल में शिव पूजा से जुड़ा हुआ है। यह समय सूर्यास्त के आसपास का माना जाता है, जब भगवान शिव की आराधना करना विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस समय की गई पूजा से साधक को सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।
हर महीने शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों में एक-एक प्रदोष व्रत आता है। इस प्रकार एक माह में दो बार यह व्रत किया जाता है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और शिव मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं या घर पर ही विधि-विधान से भगवान शिव का ध्यान करते हैं।
जैसे ही जून का महीना शुरू होने वाला है, श्रद्धालु इस माह में पड़ने वाले प्रदोष व्रत की तिथियों को लेकर उत्सुक हैं। धार्मिक कैलेंडर के अनुसार, जून में भी दो प्रदोष व्रत पड़ेंगे, जिनका संबंध कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि से होता है।
इस दिन भक्त सुबह से ही व्रत का पालन करते हैं और शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी की पूजा की जाती है। पूजा में जल, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और दूध का विशेष महत्व होता है।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, प्रदोष व्रत न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करता है। माना जाता है कि इस व्रत से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और साधक के सभी कार्य सफल होते हैं।
भक्तों के लिए यह व्रत आस्था, संयम और भक्ति का प्रतीक है, जो उन्हें भगवान शिव के प्रति समर्पण की भावना से जोड़ता है। जून माह के प्रदोष व्रत को लेकर मंदिरों में भी विशेष तैयारियां देखी जाती हैं और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना रहती है।





