धर्म-अध्यात्म

Sawan में करें भोलेनाथ को प्रसन्न, जानें सोमवारी व्रत की तिथियां

Tara Tandi
20 July 2026 7:00 PM IST
Sawan में करें भोलेनाथ को प्रसन्न, जानें सोमवारी व्रत की तिथियां
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Sawan Month 2026 ज्योतिष न्यूज़ : भगवान शिव के उपासकों के लिए सावन का महीना अत्यंत पवित्र और आनंदमय माना जाता है। यह पूरा समय भक्ति, आस्था और साधना से जुड़ा होता है। मान्यता है कि इस महीने में सच्चे मन से महादेव की पूजा करने पर जीवन की परेशानियां कम होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होने लगती हैं। भगवान शिव की सरलता के बारे में कहा जाता है कि वे थोड़े से जल और बेलपत्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। ऐसे में यदि आप अपनी किसी इच्छा की पूर्ति चाहते हैं, तो सावन के सोमवार का व्रत रखना विशेष फलदायी माना जाता है। इसी दौरान कांवड़ यात्रा का भी आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु गंगाजल लाकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। वर्ष 2026 में सावन का शुभारंभ 30 जुलाई से होगा और इसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन होगा। आइए जानते हैं कि इस बार सावन में कितने सोमवार पड़ेंगे और सोमवारी व्रत की
पूजा विधि
क्या है।
सावन 2026 में कितने सोमवार पड़ेंगे?
हिंदू परंपरा में सावन का महीना विशेष महत्व रखता है और इस दौरान हर ओर शिव भक्ति का माहौल रहता है। मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है और श्रद्धालु पूरे महीने पूजा-अर्चना में लगे रहते हैं। खासतौर पर सावन के सोमवार को अत्यधिक शुभ माना गया है। इन दिनों को सोमवारी व्रत के नाम से जाना जाता है, जिसमें भक्त उपवास रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।
वर्ष 2026 में सावन के दौरान कुल चार सोमवार पड़ेंगे:
पहला सावन सोमवार – 3 अगस्त 2026
दूसरा सावन सोमवार – 10 अगस्त 2026
तीसरा सावन सोमवार – 17 अगस्त 2026
चौथा और अंतिम सावन सोमवार – 24 अगस्त 2026
सावन सोमवार व्रत की पूजा विधि
सावन सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इस दिन हरे, केसरिया या सफेद रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर के पूजा स्थल या किसी शिव मंदिर में जाकर व्रत का संकल्प लें। पूजा की शुरुआत शिवलिंग पर जल अर्पित करने से करें। इसके पश्चात कच्चा दूध, शहद, दही, घी और चीनी से अभिषेक करें।
अंत में पुनः स्वच्छ जल या गंगाजल चढ़ाएं। फिर शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाकर बेलपत्र (बिना कटे-फटे), सफेद पुष्प, भांग और धतूरा अर्पित करें। इसके बाद दीपक और धूप जलाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें। पूजा के समापन पर भगवान शिव को फल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
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