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धर्म-अध्यात्म
पितृ पक्ष के अंतिम दिन करें पौधारोपण, जानें क्या कहती है परंपरा
nidhi
10 Oct 2026 9:36 AM IST

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पितरों के सम्मान में लगाएं शमी
हिंदू धर्म में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने, श्राद्ध करने तथा तर्पण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को मनाई जा रही है। मान्यता है कि जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या किसी कारणवश उनका श्राद्ध नहीं हो पाया, वे इस दिन विधि-विधान से श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं।
इस अवसर पर पितरों की शांति और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कई धार्मिक उपाय भी बताए जाते हैं। इन्हीं में पौधे लगाने का उपाय शामिल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ विशेष पौधों को घर या उसके आसपास लगाना शुभ माना जाता है। इनमें शमी, तुलसी और अशोक के पौधों का उल्लेख मिलता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि आठ पीढ़ियों का पितृ दोष इन पौधों से निश्चित रूप से समाप्त हो जाता है, इस दावे का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसे धार्मिक आस्था और परंपरा के संदर्भ में ही देखना चाहिए।
1. शमी का पौधा
हिंदू धार्मिक परंपरा में शमी के पौधे को शुभ माना जाता है। इसका संबंध भगवान शिव और शनिदेव की पूजा से भी जोड़ा जाता है। मान्यता के अनुसार, शमी का पौधा घर के बाहर उचित स्थान पर लगाने से सकारात्मकता बनी रहती है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन पौधारोपण करने वाले लोग इसे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और धार्मिक आस्था व्यक्त करने का एक तरीका मानते हैं।
शमी का पौधा लगाने से पहले ऐसी जगह चुनें, जहां उसे पर्याप्त धूप और बढ़ने के लिए जगह मिल सके। पौधे की नियमित देखभाल करना भी जरूरी है, ताकि वह अच्छी तरह विकसित हो सके।
2. तुलसी का पौधा
तुलसी हिंदू धर्म में पूजनीय पौधों में शामिल है। इसे भगवान विष्णु से संबंधित पूजा-पाठ में विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, घर में तुलसी का पौधा होने से वातावरण पवित्र बना रहता है। कई परिवार नियमित रूप से तुलसी की पूजा करते हैं और शाम को उसके पास दीपक जलाते हैं।
सर्वपितृ अमावस्या पर तुलसी का पौधा लगाना भी शुभ माना जाता है। यदि घर में पहले से तुलसी लगी है, तो उसकी उचित देखभाल की जा सकती है। नया पौधा लगाने के लिए पर्याप्त रोशनी और पानी की निकासी वाली जगह चुनना बेहतर होता है।
3. अशोक का पौधा
अशोक के पौधे को भी धार्मिक परंपराओं में पवित्र माना जाता है। इसके पत्तों का उपयोग पूजा और सजावट में किया जाता है। मान्यता है कि अशोक का पौधा घर के आसपास लगाने से सुख-शांति का वातावरण बना रहता है। कुछ धार्मिक मान्यताओं में इसे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने से भी जोड़ा जाता है।
यदि आपके घर के आसपास पर्याप्त जगह है, तो अशोक का पौधा लगाया जा सकता है। इसे ऐसी जगह लगाएं जहां पेड़ को आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त स्थान मिल सके। नियमित सिंचाई और उचित देखभाल से पौधे को विकसित होने में मदद मिलेगी।
सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध और तर्पण का महत्व
सर्वपितृ अमावस्या पर पौधे लगाने के साथ पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान करने की परंपरा भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जल और काले तिल से तर्पण करना तथा जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करना पुण्यकारी माना जाता है। जिन लोगों के पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, वे भी इस दिन श्राद्ध कर सकते हैं।
पितृ दोष को लेकर अलग-अलग ज्योतिषीय मान्यताएं प्रचलित हैं। हालांकि, परिवार में आने वाली परेशानियों को केवल पितृ दोष से जोड़ना उचित नहीं है। पौधारोपण को धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सार्थक कदम माना जा सकता है। इस सर्वपितृ अमावस्या पर शमी, तुलसी और अशोक के पौधे लगाकर उनकी नियमित देखभाल करें। पूर्वजों का स्मरण, परिवार के बुजुर्गों का सम्मान और जरूरतमंदों की सहायता करना भी इस अवसर के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
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