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धर्म-अध्यात्म
पिठोरी अमावस्या 2026: जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Tara Tandi
26 Aug 2026 5:18 PM IST

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Pithori Amavasya ज्योतिष न्यूज़: संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से माताएं कई तरह के व्रत और धार्मिक अनुष्ठान करती हैं। पिठोरी अमावस्या भी ऐसा ही एक पर्व है, जिसे संतान के कल्याण और परिवार की सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन 64 देवियों की पूजा करने की परंपरा है। आइए जानते हैं पिठोरी अमावस्या 2026 की तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व, नियम और पौराणिक कथा।
पिठोरी अमावस्या कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, पिठोरी अमावस्या भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। 2026 में पिठोरी अमावस्या 10 सितंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन माताएं संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना से व्रत रखकर 64 देवियों की पूजा करती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व को स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग नामों से भी जाना जाता है। महाराष्ट्र और कुछ अन्य क्षेत्रों में इससे जुड़ी लोक परंपराएं विशेष रूप से प्रचलित हैं।
पिठोरी अमावस्या शुभ मुहूर्त
पिठोरी अमावस्या की तारीख: 10 सितंबर 2026, गुरुवार
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 9 सितंबर 2026 की रात 11:20 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त: 10 सितंबर 2026 की रात 9:45 बजे
पूजा के लिए शुभ समय: सुबह 6:07 बजे से 9:18 बजे तक
पितृ तर्पण और दान का समय: दोपहर 11:45 बजे से 1:30 बजे तक
पिठोरी अमावस्या व्रत क्या है?
पिठोरी अमावस्या भाद्रपद कृष्ण अमावस्या के दिन रखा जाने वाला व्रत है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन माताएं अपनी संतान के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना से व्रत करती हैं। इस पर्व में आटे से 64 देवियों की प्रतिमाएं बनाने और उनकी पूजा करने की परंपरा विशेष मानी जाती है। 'पिठोरी' नाम को आटे से जुड़ी इस परंपरा से जोड़ा जाता है। पूजा में माता दुर्गा और अन्य देवी स्वरूपों का स्मरण किया जाता है।
पिठोरी अमावस्या का धार्मिक महत्व
पिठोरी अमावस्या को मातृशक्ति और संतान के बीच प्रेम एवं आस्था का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक देवी-देवताओं की पूजा और व्रत करने से संतान के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। अमावस्या तिथि होने के कारण इस दिन पितरों के लिए तर्पण, दान और प्रार्थना करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में इसे परिवार की सुख-शांति और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर माना गया है। हालांकि, संतान की आयु या स्वास्थ्य से जुड़े फल धार्मिक आस्था और मान्यताओं का हिस्सा हैं; इन्हें निश्चित चिकित्सकीय परिणाम के रूप में नहीं लेना चाहिए।
पिठोरी अमावस्या की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें। पूजा स्थान की सफाई करने के बाद संतान के सुखी, स्वस्थ और मंगलमय जीवन की कामना करते हुए व्रत का संकल्प लें।
चावल या गेहूं के आटे को गूंथकर छोटी-छोटी प्रतीकात्मक प्रतिमाएं तैयार करें। इन्हें साफ चौकी पर वस्त्र बिछाकर व्यवस्थित रूप से स्थापित करें। अपनी परंपरा के अनुसार माता दुर्गा का भी पूजन करें।
देवी प्रतिमाओं पर जल अर्पित करें। इसके बाद रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। श्रद्धानुसार चुनरी और सुहाग सामग्री भी चढ़ाई जा सकती है।
पूजा के दौरान दीपक जलाएं और पिठोरी अमावस्या की व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें। इसके बाद देवी की आरती करें और संतान के उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना करें।
देवी को घर में तैयार किया हुआ सात्विक भोग अर्पित करें। पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें।
पिठोरी अमावस्या व्रत के नियम
माताएं अपनी संतान के कल्याण की कामना से व्रत रखती हैं।
दिनभर सात्विक विचार और आचरण रखने की कोशिश करें।
पूजा स्थल और घर की साफ-सफाई रखें।
अपनी परंपरा के अनुसार निराहार या फलाहार व्रत किया जा सकता है।
स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर कठिन उपवास करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दें।
पूजा में देवी-देवताओं को श्रद्धापूर्वक भोग और प्रसाद अर्पित करें।
अमावस्या के अवसर पर जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है।
पिठोरी अमावस्या पर क्या करें?
सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
64 देवियों का विधि-विधान से पूजन करें।
माता दुर्गा का स्मरण और पूजा करें।
संतान के अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की प्रार्थना करें।
जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न या वस्त्र का दान करें।
पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक तर्पण करें।
घर में शांत और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें।
पिठोरी अमावस्या पर क्या न करें?
पूजा के दौरान क्रोध, विवाद और अपशब्दों से बचें।
जानबूझकर किसी व्यक्ति को परेशान या अपमानित न करें।
अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक कठिन उपवास न करें।
धार्मिक मान्यताओं के नाम पर किसी तरह की अंधविश्वासी या हानिकारक गतिविधि न करें।
पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाने से बचें।
पिठोरी अमावस्या की पौराणिक कथा
पिठोरी अमावस्या से जुड़ी लोककथा में एक परिवार की छोटी बहू का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि उसकी संतान जन्म लेने के बाद जीवित नहीं रह पाती थी। इससे वह बहुत दुखी रहती थी और संतान की सुरक्षा के लिए देवी की आराधना करना चाहती थी। एक बार भाद्रपद अमावस्या के दिन परिवार की अन्य महिलाएं पिठोरी अमावस्या का व्रत रखकर 64 देवियों की पूजा कर रही थीं। छोटी बहू ने भी श्रद्धापूर्वक इस व्रत को किया और देवी से अपनी संतान के कल्याण की प्रार्थना की। लोककथा के अनुसार, उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी शक्तियों ने उसे आशीर्वाद दिया और उसकी संतान को जीवन प्राप्त हुआ। इस घटना के बाद संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए पिठोरी अमावस्या का व्रत रखने की परंपरा और मजबूत हुई। यह कथा धार्मिक लोकविश्वास का हिस्सा है और इसका उद्देश्य मातृभक्ति, देवी आराधना और संतान के प्रति मां की ममता को दर्शाना है।
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