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धर्म-अध्यात्म
धनतेरस पर शाम 6:02 से 7:57 बजे तक करें पूजा, जानें यम दीपदान का महत्व
nidhi
6 Nov 2026 8:55 AM IST

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धनतेरस पर इस दिशा में जलाएं दीपक
नई दिल्ली: देशभर में आज शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को धनतेरस का पावन पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में धनतेरस को सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा करने की परंपरा है। इसके साथ ही धनतेरस की शाम यमराज के नाम पर दीपक जलाने का भी विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। मान्यता है कि यम दीपदान करने से परिवार के सदस्यों की लंबी आयु की कामना पूरी होती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष धनतेरस की पूजा का शुभ मुहूर्त नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार शाम 6 बजकर 02 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। यह समय माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा के लिए शुभ माना गया है। वहीं यम दीपदान शाम के प्रदोष काल में किया जाता है।
धनतेरस पर यम दीपदान का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त दीपक जलाने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। इस अनुष्ठान का उद्देश्य परिवार की सुख-शांति, सुरक्षा और सदस्यों की दीर्घायु की कामना करना है।
मान्यता है कि यमराज के नाम पर दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय कम होता है। हालांकि यह धार्मिक विश्वास है और इससे मृत्यु या किसी दुर्घटना को रोकने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
किस समय करें यम दीपदान?
पंचांग के अनुसार, नई दिल्ली में 6 नवंबर को धनतेरस का प्रदोष काल शाम लगभग 5 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। इसी अवधि में यम दीपदान किया जा सकता है।
वहीं शाम 6 बजकर 02 मिनट से 7 बजकर 57 मिनट तक का समय धनतेरस पर लक्ष्मी-कुबेर पूजन के लिए विशेष शुभ मुहूर्त है। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार प्रदोष काल में दीपक जलाकर यमराज का स्मरण कर सकते हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त के समय के कारण पूजा और दीपदान का मुहूर्त कुछ अलग हो सकता है।
यम दीपदान की विधि
यम दीपदान के लिए सबसे पहले घर के मुख्य द्वार के आसपास साफ-सफाई करें। इसके बाद मिट्टी का दीपक लें और उसमें सरसों का तेल या अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अन्य तेल डालें।
कई परिवारों में इस अवसर पर चौमुखी दीपक जलाने की परंपरा है। इसमें चार दिशाओं में बातियां लगाई जाती हैं। दीपक जलाने के बाद उसे घर के मुख्य द्वार के बाहर किसी सुरक्षित स्थान पर रखें।
कुछ धार्मिक परंपराओं में दीपक दक्षिण दिशा की ओर रखने का विधान बताया गया है, क्योंकि दक्षिण दिशा का संबंध यमराज से माना जाता है।
दीपदान करते समय यमराज का स्मरण करें और परिवार के सभी सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और सुखमय जीवन की प्रार्थना करें।
दीपक जलाते समय अग्नि सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। उसे सूखे पत्तों, कपड़ों, पर्दों या अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की भी करें पूजा
धनतेरस का संबंध भगवान धन्वंतरि से भी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आरोग्य का देवता माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान धन्वंतरि की पूजा करके स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं। साथ ही माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की आराधना करके घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। धनतेरस पर सोना, चांदी, पीतल के बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी भी शुभ मानी जाती है। हालांकि इस दिन महंगी वस्तुओं की खरीदारी करना आवश्यक नहीं है। श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी पर्व की भावना से जुड़ा है। इस प्रकार धनतेरस पर यम दीपदान की परंपरा जीवन की सुरक्षा, स्वास्थ्य और दीर्घायु के प्रति प्रार्थना का प्रतीक है। इस अवसर पर परिवार के साथ पूजा करके दीपोत्सव की शुरुआत की जा सकती है।
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