धर्म-अध्यात्म

सूर्य ग्रहण समाप्ति पर करें शिवलिंग का यह उपाय, कटेंगे सारे कष्ट

Tara Tandi
12 Aug 2026 3:08 PM IST
सूर्य ग्रहण समाप्ति पर करें शिवलिंग का यह उपाय, कटेंगे सारे कष्ट
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ज्योतिष न्यूज़ : इस साल हरियाली अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण का संयोग बन रहा है। हालांकि, यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन ज्योतिष की दृष्टि से इस खगोलीय घटना को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हरियाली अमावस्या और ग्रहण का एक साथ पड़ना इस दिन को और भी खास बना रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, इसलिए इसके बाद पूजा-पाठ और धार्मिक उपायों का विशेष महत्व माना जाता है। चूंकि यह ग्रहण सावन माह में पड़ रहा है, इसलिए इसके समाप्त होने के बाद भगवान शिव की पूजा करने और शिवलिंग पर कुछ विशेष चीजें अर्पित करने से नकारात्मकता दूर हो सकती है। इससे मन को शांति मिलती, स्थिरता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार जीवन में होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि, ग्रहण समाप्त होने के बाद
शिवलिंग पर किन चीजों को अर्पित करना शुभ
माना जाता है।
दूध और शहद अर्पित करें
ग्रहण खत्म होने के बाद शिवलिंग पर दूध और शहद अर्पित करें। इस दौरान कुछ फूल अवश्य रखें। ऐसा करने से सभी तरह की नकारात्मकता दूर होती है। इसके अलावा व्यक्ति को सुख-समृद्धि भी मिलती है।
बेलपत्र और आक के फूल चढ़ाएं
आप शिवलिंग पर बेलपत्र और आक के फूल चढ़ाकर शिव चालीसा का पाठ करें। इससे मनोवांछित फल मिलते हैं। साथ ही भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
गुड़ चढ़ाकर दान करें
ग्रहण के बाद शिवलिंग पर ग्रहण के बाद गुड़ चढ़ाएं। साथ ही इसका दान भी करें। यह शुभ होता है और इससे आत्मविश्वास जीवन में बढ़ता है। इसके अलावा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।
दही और आलू अर्पित करें
आप शिवलिंग पर दही चढ़ाकर महादेव को आलू भी चढ़ाएं। इससे लाभ और विवाह योग बनते हैं। साथ ही भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें
ग्रहण के बाद शिवलिंग की पूजा करें और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। मान्यता है कि ऐसा करने से नकारात्मकता दूर होती है और मन को शांति मिलती है। वहीं, जीवन में सकारात्मकता और शुभता भी बढ़ती है।
मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्, उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।
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