धर्म-अध्यात्म

28 अगस्त को वरलक्ष्मी व्रत धन समृद्धि के लिए ऐसे करें पूजा

Ratna Netam
11 Aug 2026 4:52 PM IST
28 अगस्त को वरलक्ष्मी व्रत धन समृद्धि के लिए ऐसे करें पूजा
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धर्म : हिंदू धर्म में सावन महीने का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसी महीने के अंतिम शुक्रवार को वरलक्ष्मी व्रत रखने की परंपरा है। यह व्रत मां लक्ष्मी के वरलक्ष्मी स्वरूप को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वरलक्ष्मी का अर्थ ऐसी देवी से है जो भक्तों को वर और समृद्धि प्रदान करती हैं। इस दिन महिलाएं परिवार की सुख-शांति, धन-धान्य और खुशहाली की कामना के साथ व्रत रखती हैं और मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करती हैं। साल 2026 में वरलक्ष्मी व्रत 28 अगस्त को मनाया जाएगा।
वरलक्ष्मी व्रत को विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और परिवार पर देवी की कृपा होती है। कई जगहों पर महिलाएं इस अवसर पर सज-धजकर पूजा करती हैं और कलश स्थापना के साथ मां लक्ष्मी का पूजन करती हैं। हालांकि व्रत और पूजा की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में कुछ अलग हो सकती हैं।
पंचांग के अनुसार 28 अगस्त 2026 को सावन मास का अंतिम शुक्रवार होगा। इस वजह से इस दिन को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूजा के लिए स्थिर लग्न को विशेष शुभ माना जाता है। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त में पूजा करना भी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ माना जाता है। सिंह, वृश्चिक, कुंभ और वृषभ लग्न में लक्ष्मी पूजा को विशेष फलदायी बताया जाता है। हालांकि पूजा का वास्तविक समय स्थान के अनुसार बदल सकता है, इसलिए श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना चाहिए।
इस वर्ष वरलक्ष्मी व्रत के अवसर पर पूर्णिमा से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों का भी महत्व रहेगा। पूर्णिमा के दिन पवित्र स्नान, दान और धार्मिक कार्यों को शुभ माना जाता है। इसी अवसर पर श्रावणी उपाकर्म जैसी धार्मिक परंपराएं भी निभाई जाती हैं। इसके साथ ही रक्षा बंधन का पर्व भी इसी अवधि में पड़ता है, जिससे यह दिन धार्मिक और पारिवारिक दृष्टि से और महत्वपूर्ण हो जाता है।
वरलक्ष्मी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ-सुथरे वस्त्र पहनने की परंपरा है। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके वहां कलश स्थापित किया जाता है। कलश को जल से भरकर उसमें आम के पत्ते और नारियल रखने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है। इसके बाद मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करके फूल, फल, मिठाई, दीपक और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है।
पूजा के दौरान मां लक्ष्मी की आराधना करने के साथ वरलक्ष्मी व्रत की कथा सुनने या पढ़ने की भी परंपरा है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार लक्ष्मी मंत्रों का जाप कर सकते हैं। शाम के समय आरती करने के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है। व्रत रखने वाले लोग पूरे दिन सात्विक भोजन करने और मन को शांत रखने का प्रयास करते हैं। कुछ श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत भी रखते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वरलक्ष्मी व्रत रखने से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मकता आती है। मां लक्ष्मी को धन और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है, इसलिए इस दिन उनकी पूजा विशेष रूप से आर्थिक सुख-समृद्धि की कामना के लिए की जाती है। विवाहित महिलाएं पति और परिवार की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए भी यह व्रत रखती हैं।
28 अगस्त 2026 को पड़ने वाला वरलक्ष्मी व्रत श्रद्धालुओं के लिए मां लक्ष्मी की आराधना का विशेष अवसर माना जा रहा है। हालांकि पूजा के समय और विधि को लेकर अलग-अलग पंचांगों और क्षेत्रों में अंतर हो सकता है। इसलिए किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य पंडित की सलाह लेना उचित रहेगा।
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