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पितृ शांति के लिए पीपल से जुड़ा यह उपाय
पितृपक्ष 2026 चल रहा है और आज, 6 अक्टूबर, एकादशी श्राद्ध का दिन है। इस साल पितृपक्ष 27 सितंबर से शुरू हुआ है और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा। धार्मिक मान्यताओं में इन दिनों पितरों की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, दान और विशेष पूजा का महत्व बताया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर घर में लगातार अशांति, कामों में रुकावट, विवाह में देरी या पारिवारिक परेशानियां बनी रहें तो कुछ लोग इसे पितृ दोष से जोड़कर देखते हैं। हालांकि पितृ दोष और उससे जुड़े प्रभाव ज्योतिषीय तथा धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाता।
पीपल के पास करें यह 1 काम
पितृपक्ष में सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनकर पीपल के पेड़ के पास जाएं। तांबे या किसी स्वच्छ पात्र में जल लें और उसमें थोड़े काले तिल मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित करें। इसके बाद पितरों का स्मरण कर उनकी शांति और आशीर्वाद की कामना करें।
कई धार्मिक परंपराओं में पीपल को देवताओं और पितरों से जुड़ा पवित्र वृक्ष माना जाता है। इसलिए पितृपक्ष में पीपल को जल अर्पित करना, दीपक जलाना और पितरों के नाम से प्रार्थना करना शुभ माना जाता है।
शाम को दीपक जलाने की भी है मान्यता
अगर संभव हो तो शाम के समय पीपल के नीचे तिल के तेल या घी का दीपक जलाया जा सकता है। दीपक सुरक्षित स्थान पर ही रखें, ताकि आग लगने का खतरा न हो। इसके बाद अपने पूर्वजों का नाम लेकर मन ही मन प्रार्थना करें।
दान का भी रखें ध्यान
पितृपक्ष में जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार दान करने की परंपरा भी है। धार्मिक मान्यता है कि पितरों के नाम से किया गया दान पुण्यदायी माना जाता है।
आज 6 अक्टूबर को इंदिरा एकादशी भी है, जो आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी पर पड़ती है। इसे पितरों की शांति और भगवान विष्णु की पूजा से विशेष रूप से जोड़ा जाता है।
ध्यान रखें कि किसी भी धार्मिक उपाय का उद्देश्य श्रद्धा, स्मरण और परिवार की परंपराओं का पालन करना है। “पितृ दोष पूरी तरह खत्म हो जाएगा” जैसी बातों को निश्चित परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
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