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धर्म-अध्यात्म
Pashupatinath Mandir जाने इसे क्यों कहा जाता है मोक्ष का द्वार ?
Tara Tandi
3 Jun 2025 6:58 PM IST

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Pashupatinath Mandir ज्योतिष न्यूज़: भगवान शिव के पशुपतिनाथ मंदिर को 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ का आधा हिस्सा माना जाता है। यह नेपाल का पशुपतिनाथ मंदिर है। पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू से 3 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में देवपाटन गांव में बागमती नदी के तट पर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि आज भी भगवान शिव यहां मौजूद हैं। इसके अलावा इस मंदिर से कई रहस्य भी जुड़े हुए हैं।
पशुपतिनाथ मंदिर का इतिहास
देवों के देव कहे जाने वाले भगवान शिव का एक नाम पशुपतिनाथ भी है। जिसका अर्थ है कि भगवान शिव चारों दिशाओं में मौजूद हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्री पशुपतिनाथ परब्रह्म शिव के सनातन स्वरूप हैं। इन्हें पंच वक्रम त्रिनेत्रम नाम से जाना जाता है। भगवान शिव के दक्षिण मुख से अ कार, पश्चिम मुख से उ कार, उत्तर मुख से म कार, पूर्व मुख से चंद्रविंदु और ऊपरी ईशान मुख से नाद के रूप में ओंकार की उत्पत्ति हुई। पशुपतिनाथ मंदिर का निर्माण सोमदेव वंश के पशुप्रेक्ष नामक राजा ने ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में करवाया था। इस मंदिर के निर्माण से जुड़े कुछ ऐतिहासिक मत हैं और उनकी मानें तो मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में हुआ था। भगवान भोलेनाथ के धाम पशुपतिनाथ में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है, लेकिन वे बाहर से इसके दर्शन कर सकते हैं। मंदिर के गर्भगृह में पंचमुखी शिवलिंग है। कहा जाता है कि ऐसी मूर्ति दुनिया में कहीं और नहीं है। हिंदू पुराणों के अनुसार पशुपतिनाथ मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना है।
दर्शन से मिलती है पशु योनि से मुक्ति
मान्यता है कि 84 लाख योनियों में भटकने के बाद व्यक्ति को मनुष्य योनि मिलती है। साथ ही व्यक्ति के कर्मों के अनुसार उसे फिर से शेष योनियों से गुजरना पड़ता है। जिनमें से एक है पशु योनि। कहा जाता है कि पशु योनि बहुत कष्टदायक होती है, इसलिए मनुष्य योनि में जन्म लेने के बाद हर कोई मोक्ष पाने की कोशिश करता है। पशुपतिनाथ मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां भगवान शिव के इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन भक्तों को इस बात का विशेष ध्यान रखना होता है कि वे भगवान शिव के दर्शन करने से पहले नंदी के दर्शन न करें। मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो उसका पशु योनि में जन्म होना निश्चित है।
आर्य घाट का जल
आर्य घाट पशुपतिनाथ मंदिर के बाहर स्थित है। प्राचीन काल से ही इस घाट का जल ही मंदिर के अंदर ले जाने का प्रावधान है। आप किसी अन्य स्थान से जल लेकर मंदिर परिसर में प्रवेश नहीं कर सकते।
पंचमुखी शिवलिंग का महत्व
इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग के पांच मुखों के अलग-अलग गुण हैं। दक्षिण की ओर वाले मुख को अघोर मुख, पश्चिम की ओर वाले मुख को सद्योजात, पूर्व और उत्तर की ओर वाले मुख को तत्पुरुष और अर्धनारीश्वर कहते हैं। ऊपर की ओर वाले मुख को ईशान मुख कहते हैं। यह निराकार मुख है। यह भगवान पशुपतिनाथ का सर्वश्रेष्ठ मुख है
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