धर्म-अध्यात्म

परिवर्तिनी एकादशी: इस दिन करें श्रीहरि की पूजा, जानें मुहूर्त

Tara Tandi
18 Sept 2026 10:54 AM IST
परिवर्तिनी एकादशी: इस दिन करें श्रीहरि की पूजा, जानें मुहूर्त
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ज्योतिष न्यूज़ : हिंदू पंचांग में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। वर्षभर में कुल 24 एकादशियां आती हैं और प्रत्येक का अपना अलग महत्व माना जाता है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी के दिन नारायण की आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। साथ ही भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करने से धन-धान्य में वृद्धि होने की मान्यता है।
एकादशी महीने में दो बार आती है। एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में। हालांकि सभी एकादशियों को पुण्यदायी माना जाता है, लेकिन परिवर्तिनी एकादशी को विशेष स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हुए करवट बदलते हैं। इस समय चातुर्मास चल रहा होता है और भगवान विष्णु देवउठनी एकादशी तक योगनिद्रा में रहते हैं। आइए जानते हैं वर्ष 2026 में परिवर्तिनी एकादशी किस दिन होगी और पूजा व पारण के लिए कौन से समय शुभ रहेंगे।
परिवर्तिनी एकादशी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 सितंबर 2026 की रात 8:00 बजे शुरू होगी और इसका समापन 22 सितंबर की रात 9:43 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर 2026 को रखा जाएगा।
परिवर्तिनी एकादशी 2026 पूजा मुहूर्त
व्रत के दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए अलग-अलग शुभ मुहूर्त रहेंगे। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:52 बजे से 5:40 बजे तक रहेगा। इसके बाद अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 बजे से 12:55 बजे तक रहेगा। वहीं गोधूलि मुहूर्त शाम 6:35 बजे से 6:59 बजे तक रहेगा। सायाह्न संध्या का समय शाम 6:35 बजे से 7:46 बजे तक रहेगा।
परिवर्तिनी एकादशी 2026 पारण का समय
एकादशी व्रत में पारण को भी महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत का समापन उचित समय पर करना चाहिए। वर्ष 2026 में परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण 23 सितंबर को किया जाएगा। पारण के लिए शुभ समय सुबह 6:27 बजे से 8:53 बजे तक रहेगा। इस दिन द्वादशी तिथि का समापन रात 10:50 बजे होगा।
मान्यता है कि एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के भीतर करना चाहिए। इसलिए व्रती को पारण का समय ध्यान में रखकर ही व्रत खोलना चाहिए।
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