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धर्म-अध्यात्म
तीन साल बाद आ रही परमा एकादशी, जानें पूजा की सही तिथि और शुभ मुहूर्त
nidhi
6 Jun 2026 12:44 PM IST

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दुर्लभ परमा एकादशी का योग, भक्तों के लिए खास पूजा मुहूर्त जारी
Parama Ekadashi 2026: एकादशी का पावन व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर यह व्रत रखा जाता है. सामान्यतः वर्ष में 24 एकादशी व्रत आते हैं, लेकिन वर्ष 2026 में ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के दुर्लभ संयोग के कारण कुल 26 एकादशी व्रत पड़ेंगे. इन्हीं में से एक है परमा एकादशी, जिसका विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है. यह व्रत हर तीन वर्ष में एक बार आने वाले अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से विशेष पुण्यफल की प्राप्ति होती है तथा जीवन से कष्ट दूर होते हैं.
परमा एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ – 11 जून 2026 को सुबह 12:57 बजे
एकादशी तिथि समाप्त – 11 जून 2026 को रात्रि 10:36 बजे
पूजा का शुभ मुहूर्त – सुबह 10:36 बजे से दोपहर 2:05 बजे तक
व्रत पारण का समय – 12 जून 2026 को सुबह 5:23 बजे से 8:10 बजे के बीच
परमा एकादशी का महत्व
पद्म पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, परमा एकादशी का व्रत करने से साधक को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्यफल प्राप्त होता है. अधिक मास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) माने गए हैं, इसलिए इस माह में आने वाली एकादशी पर की गई पूजा-अर्चना का फल अक्षय माना जाता है.
धार्मिक मान्यता है कि यह व्रत जीवन से आर्थिक तंगी, दरिद्रता और विभिन्न प्रकार के कष्टों को दूर करने में सहायक होता है. इसके अलावा, परमा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है तथा मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है.
व्रत के दिन न करें ये गलतियां
अन्न और चावल का सेवन न करें: एकादशी के दिन चावल और अन्न का सेवन वर्जित माना गया है. कई लोग इस दिन घर में चावल बनाना भी उचित नहीं मानते.
तामसिक भोजन से दूर रहें: इस दिन लहसुन, प्याज, मांसाहार और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए. घर का वातावरण सात्विक और पवित्र बनाए रखें.
क्रोध और निंदा से बचें: व्रत के दौरान मन को शांत और सकारात्मक रखें. किसी का अपमान न करें, कटु वचन न बोलें और न ही किसी की निंदा करें. मान्यता है कि ऐसा करने से व्रत का पुण्यफल कम हो जाता है.
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