धर्म-अध्यात्म

करवा चौथ पर सरगी के लिए सिर्फ 1 घंटा, जानें शुभ मुहूर्त

Rajeshwari Nishad
28 Oct 2026 4:03 PM IST
करवा चौथ पर सरगी के लिए सिर्फ 1 घंटा, जानें शुभ मुहूर्त
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Karwa Chauth Sargi Time: हिंदू धर्म में करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस साल करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। कई क्षेत्रों में करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले सरगी खाने की परंपरा है। आमतौर पर सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, जिसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे, मठरी और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। सरगी खाने के बाद महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखने का संकल्प लेती हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 29 अक्टूबर को सरगी खाने का शुभ समय कब से कब तक रहेगा? ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार सरगी के लिए लगभग एक घंटे का विशेष शुभ समय बताया गया है।
करवा चौथ पर सरगी खाने का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा के अनुसार, करवा चौथ पर सरगी सूर्योदय से पहले ग्रहण करनी चाहिए। विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त में सरगी खाना शुभ माना जाता है।29 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के अनुसार सरगी खाने के लिए सुबह 4 बजकर 30 मिनट से 5 बजकर 30 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है।इस दौरान महिलाएं सरगी ग्रहण करके व्रत की तैयारी कर सकती हैं।दिल्ली में सूर्योदय सुबह लगभग 6 बजकर 30 मिनट पर होगा। इसलिए सरगी का सेवन सूर्योदय से पहले पूरा कर लेना चाहिए।हालांकि, विभिन्न पंचांगों में ब्रह्म मुहूर्त का समय थोड़ा अलग बताया गया है। कुछ पंचांगों के अनुसार यह सुबह 4 बजकर 48 मिनट से 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा।ध्यान देने वाली बात यह है कि सरगी के लिए केवल एक घंटे का अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है। मुख्य परंपरा सूर्योदय से पहले भोजन करना है।
करवा चौथ 2026 — दिल्ली के अनुसार प्रमुख समय
व्रत की तारीख
29 अक्टूबर, गुरुवार
सरगी का सुझाया शुभ समय
सुबह 4:30 – 5:30 बजे
सूर्योदय
सुबह 6:31 बजे
शाम की पूजा
5:38 – 6:56 बजे
अनुमानित चंद्रोदय
रात 8:17 बजे
समय स्थान के अनुसार बदल सकता है।
करवा चौथ पर सरगी देने की परंपरा क्यों है खास?
करवा चौथ पर सरगी का विशेष धार्मिक और पारिवारिक महत्व माना जाता है। कई परिवारों में सास अपनी बहू को सरगी की थाली तैयार करके देती हैं।इस थाली में खाने-पीने की चीजों के साथ कपड़े, श्रृंगार सामग्री और अन्य उपहार भी रखे जा सकते हैं।सास अपनी बहू को सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देती हैं। इसके बाद बहू सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती है।धार्मिक मान्यताओं में इस परंपरा को सास और बहू के बीच प्रेम, सम्मान और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत बनाने का प्रतीक माना जाता है।हालांकि, देश के सभी हिस्सों में सरगी की परंपरा एक जैसी नहीं है। कुछ क्षेत्रों में इसे विशेष महत्व दिया जाता है, जबकि कई स्थानों पर महिलाएं बिना सरगी की रस्म के भी करवा चौथ का व्रत रखती हैं।
सरगी की थाली में क्या-क्या रखना चाहिए?
करवा चौथ का व्रत लंबे समय तक चल सकता है। इसलिए सरगी में संतुलित और पौष्टिक भोजन शामिल करना उपयोगी है।सरगी की थाली में सेवईं या फेनी, फल, सूखे मेवे, मठरी, मिठाई और अन्य पारंपरिक पकवान रखे जाते हैं।इसके अलावा केला, सेब, अनार, बादाम, अखरोट और खजूर जैसी चीजें भी शामिल की जा सकती हैं।दूध, दही और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ भी सुबह के भोजन का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।अधिक तला-भुना या बहुत नमकीन भोजन करने से दिन में प्यास ज्यादा लग सकती है। इसलिए सरगी में हल्का और संतुलित भोजन लेना बेहतर रहता है।व्रत शुरू होने से पहले पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। हालांकि, दिनभर निर्जला उपवास रखने से कुछ लोगों में पानी की कमी या कमजोरी की समस्या हो सकती है।
सास दूर रहती हैं तो कैसे करें सरगी की रस्म?
आजकल कई परिवार नौकरी और अन्य कारणों से अलग-अलग शहरों में रहते हैं। ऐसे में करवा चौथ के दिन सास का बहू के साथ मौजूद रहना हमेशा संभव नहीं होता।ऐसी स्थिति में सास पहले से सरगी की सामग्री या उपहार भेज सकती हैं।बहू घर में उपलब्ध सामग्री से भी सरगी तैयार कर सकती है। इसके बाद वह फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से सास का आशीर्वाद ले सकती है।यदि सास का निधन हो चुका है, तो परिवार की परंपरा के अनुसार घर की कोई वरिष्ठ महिला सरगी दे सकती है।सरगी की रस्म का मुख्य उद्देश्य प्रेम और पारिवारिक सम्मान व्यक्त करना है। इसलिए इसे परिस्थितियों और परिवार की रीति के अनुसार निभाया जा सकता है।
सरगी खाने के बाद कब शुरू होगा व्रत?
करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले सरगी खाने की परंपरा है। इसके बाद महिलाएं व्रत का संकल्प लेती हैं।दिल्ली में 29 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह लगभग 6 बजकर 31 मिनट पर होगा।ऐसे में सूर्योदय से पहले सरगी का सेवन पूरा कर लेना चाहिए।इसके बाद पारंपरिक निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं चंद्रमा के दर्शन तक अन्न और जल ग्रहण नहीं करती हैं।हालांकि, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, बुजुर्गों और मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को उपवास से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर पानी या आवश्यक भोजन लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।
शाम को कब होगी करवा चौथ की पूजा?
करवा चौथ के दिन शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा की जाती है।29 अक्टूबर को दिल्ली के अनुसार पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक बताया गया है।इस दौरान महिलाएं करवा चौथ की कथा सुनती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।पूजा में करवा, रोली, अक्षत, दीपक, पुष्प और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।इसके बाद महिलाएं चंद्रमा निकलने का इंतजार करती हैं। दिल्ली में चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8 बजकर 17 मिनट है।चंद्रमा के दर्शन होने पर जल से अर्घ्य दिया जाता है। कई परिवारों में महिलाएं छलनी से चंद्रमा और पति का चेहरा देखने के बाद व्रत खोलती हैं।
सरगी खाते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान
करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर सरगी की तैयारी कर लेनी चाहिए।यदि परिवार में ब्रह्म मुहूर्त में सरगी खाने की परंपरा है, तो 29 अक्टूबर को सुबह 4:30 से 5:30 बजे के बीच सरगी ग्रहण की जा सकती है।हालांकि, सूर्योदय का समय अलग-अलग शहरों में बदलता है। उदाहरण के लिए, रायपुर में 29 अक्टूबर को सूर्योदय लगभग 6 बजकर 5 मिनट पर होगा। इसलिए स्थानीय पंचांग का समय देखना जरूरी है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ का त्योहार पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। सरगी इस पर्व की एक महत्वपूर्ण पारिवारिक परंपरा है।इसलिए महिलाएं अपने परिवार की परंपरा के अनुसार सरगी ग्रहण कर सकती हैं और व्रत की तैयारी कर सकती हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि उपवास के दौरान धार्मिक आस्था के साथ अपने स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखा जाए।
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