धर्म-अध्यात्म

दही हांडी का उत्सव आज जानें श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा असली रहस्य

nidhi
5 Sept 2026 10:47 AM IST
दही हांडी का उत्सव आज जानें श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा असली रहस्य
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आज मचेगा दही हांडी का धमाल

धर्म : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन आज यानी 5 सितंबर 2026, शनिवार को दही हांडी उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। खासतौर पर महाराष्ट्र में मुंबई, ठाणे और पुणे समेत कई शहरों में सुबह से ही 'गोविंदा आला रे' की गूंज सुनाई दे रही है। दही हांडी भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ी परंपरा है, जिसमें गोविंदा पथक मानव पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर बांधी गई दही-मक्खन से भरी मटकी को फोड़ते हैं।

द्वापर युग से जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में बाल कृष्ण को दूध, दही और मक्खन बेहद प्रिय था। श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ गोकुल में गोपियों के घर जाकर माखन चुरा लिया करते थे। इसी कारण उन्हें प्रेम से 'माखन चोर' भी कहा गया।
कहा जाता है कि कृष्ण की शरारतों से बचने के लिए गोपियां दही और मक्खन की मटकियों को घर में काफी ऊंचाई पर लटकाने लगीं। लेकिन कान्हा ने इसका भी उपाय निकाल लिया। वह अपने मित्रों के साथ मिलकर एक-दूसरे के ऊपर चढ़ते और मानव पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर रखी मटकी तक पहुंच जाते थे। इसके बाद मटकी फोड़कर माखन अपने दोस्तों में बांट देते थे। इसी बाल लीला की स्मृति में दही हांडी की परंपरा प्रचलित मानी जाती है।
क्यों बनाई जाती है मानव पिरामिड?
दही हांडी में कई गोविंदा मिलकर मानव पिरामिड बनाते हैं। सबसे ऊपर चढ़ने वाला प्रतिभागी मटकी फोड़ता है। यह केवल श्रीकृष्ण की बाल लीला का प्रतीक नहीं बल्कि एकता, टीमवर्क, साहस, संतुलन और सामूहिक प्रयास का संदेश भी देता है।
मान्यता के अनुसार जिस तरह श्रीकृष्ण अपने सखाओं की मदद से ऊंचाई पर रखी मटकी तक पहुंचते थे, उसी तरह जीवन में भी कठिन लक्ष्य सामूहिक प्रयास और सहयोग से हासिल किए जा सकते हैं।
हांडी में क्यों रखा जाता है दही-मक्खन?
दही हांडी में पारंपरिक रूप से दही, दूध, मक्खन और दूसरी सामग्री रखी जाती है। ये चीजें भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोकुल की गोपाल संस्कृति से जुड़ी मानी जाती हैं। दही और मक्खन इस उत्सव में समृद्धि, पोषण और कृष्ण भक्ति के प्रतीक के रूप में भी देखे जाते हैं।
महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा उत्साह
दही हांडी की परंपरा देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न रूपों में दिखाई देती है, लेकिन महाराष्ट्र में इसका उत्साह सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। मुंबई और ठाणे जैसे शहरों में गोविंदा पथक कई स्तरों वाले मानव पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर लटकी हांडी फोड़ने का प्रयास करते हैं।
इस तरह दही हांडी सिर्फ एक रोमांचक प्रतियोगिता नहीं बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की नटखट बाल लीलाओं को जीवंत करने वाला धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव है। माखन चोरी की कथा से शुरू हुई मानी जाने वाली यह परंपरा आज भक्ति, उत्साह, साहस और एकजुटता का प्रतीक बन चुकी है।
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