धर्म-अध्यात्म

वट सावित्री व्रत करने पर होती है अखंड सौभाग्य और संतान की प्राप्ति, भीगे चने खाने की भी है परंपरा

Renuka Sahu
19 May 2022 2:51 AM GMT
On observing Vat Savitri fast, there is unbroken good fortune and children, there is also a tradition of eating soaked gram.
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फाइल फोटो 

वट सावित्री व्रत पर महिलाएं अपने पति की लबी उम्र के लिए वट सावित्री व्रत रखती हैं। इस दिन वट वृक्ष की पूजा की जाती है।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। वट सावित्री व्रत पर महिलाएं अपने पति की लबी उम्र के लिए वट सावित्री व्रत रखती हैं। इस दिन वट वृक्ष की पूजा की जाती है। महिलाएं सुबह नए कपड़े पहनकर श्रंगार करके वट वृक्ष की परिक्रमा करती है। इसके बाद चारों ओर पीला धागा लेपटा जाता है और कथा सुनी जाती है। इस दिन भीगे हुए चने खाने की भी परंपरा है। कहा जाता है कि इस दिन 11 भीगे हुए चने बिना चबाए खाए जाते हैं। उसी को खाकर व्रत का समापन होता है। इस दिन दान पुण्य का भी कास महत्व है। कई जगह इस दिन सास को बायना देने की भी परंपरा है। कहा जाता है कि इस दिन सास को खाना, फल, कपड़े आदि का दान करना बहुत शुभ होता है। इसके अलावा अपने से किसी भी बड़े को भी दान किया जाता है। हाथ का पंखा, खरबूज और आम का दान के लिए इस्तेमाल होता है। इस व्रत में वट वृक्ष के पूजे जाने के पीछे भी एक कहानी है।

कहा जाता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति के लिए वट वृक्ष के नीचे तप कर पति को यमराज से छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। इसीलिए महिलाएं हर साल वट वृक्ष की पूजा करती हैं। इस व्रत को करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य और संतान की प्राप्ति होती है।
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