धर्म-अध्यात्म

शरद पूर्णिमा पर खीर का भोग, जानें चांदनी में रखने की परंपरा

nidhi
24 Oct 2026 8:19 AM IST
शरद पूर्णिमा पर खीर का भोग, जानें चांदनी में रखने की परंपरा
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चंद्र पूजा और खीर का विशेष महत्व
शरद पूर्णिमा का पर्व इस वर्ष रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस अवसर पर चंद्र पूजा और दूध-चावल की खीर का भोग लगाने की परंपरा है। कई परिवार खीर को कुछ समय चांदनी में रखकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। धार्मिक मान्यता में इस रात की चांदनी को विशेष महत्व दिया जाता है और खीर को ‘अमृत खीर’ भी कहा जाता है। यह आस्था से जुड़ा नाम है, प्रमाणित औषधीय गुण का दावा नहीं।
चांदनी में खीर रखने की परंपरा
लोकमान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणें शुभ मानी जाती हैं। इसी विश्वास से खीर का भोग लगाकर परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटा जाता है। पूजा की विधि और समय क्षेत्र तथा पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं। अपने स्थान के पंचांग के अनुसार समय देखना उचित रहेगा।
क्या पीपल की छाल मिलाना अनिवार्य है?
खीर में पीपल की छाल मिलाने को शरद पूर्णिमा का सार्वभौमिक या अनिवार्य विधान बताने वाला विश्वसनीय प्रमाण नहीं मिला है। इसलिए इसे सभी श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सामग्री के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
किसी पेड़ की छाल या अन्य वनस्पति को केवल प्राकृतिक होने के कारण खाने योग्य और सुरक्षित नहीं मानना चाहिए। उसकी पहचान, शुद्धता, मात्रा और दवाओं के साथ संभावित प्रभाव महत्वपूर्ण होते हैं। स्वास्थ्य संबंधी उद्देश्य से खीर में पीपल की छाल स्वयं न मिलाएं; पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लें।
रातभर बाहर रखने से खराब हो सकती है खीर
दूध और पके चावल से बनी खीर जल्दी खराब होने वाला भोजन है। इसे पूरी रात सामान्य तापमान पर छोड़ना सुरक्षित नहीं है। खाद्य सुरक्षा निर्देशों के अनुसार, ऐसे भोजन को दो घंटे के भीतर फ्रिज में रखना चाहिए। तापमान लगभग 32 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो तो यह अवधि एक घंटा है।
परंपरा निभाने के लिए खीर की थोड़ी मात्रा साफ, ढके बर्तन में थोड़े समय के लिए रखें और बाकी खीर फ्रिज में सुरक्षित रखें। केवल ढक देने या चांदनी में रखने से भोजन खराब होने का खतरा समाप्त नहीं होता। निर्धारित सुरक्षित अवधि से अधिक बाहर रखी खीर का सेवन न करें।
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