धर्म-अध्यात्म

इंदिरा एकादशी पर पीपल को चढ़ाएं जल, जानें मान्यता

nidhi
5 Oct 2026 11:49 AM IST
इंदिरा एकादशी पर पीपल को चढ़ाएं जल, जानें मान्यता
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पितरों के स्मरण के लिए इंदिरा एकादशी पर करें ये उपाय
धर्म डेस्क: हिंदू धर्म में इंदिरा एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। यह एकादशी पितृ पक्ष के दौरान पड़ती है, इसलिए इसे भगवान विष्णु की पूजा के साथ पितरों के स्मरण और तर्पण के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ और दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इंदिरा एकादशी के दिन पीपल के पेड़ की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि पीपल में देवताओं और पितरों का वास माना जाता है। ऐसे में इस दिन पीपल से जुड़ा एक सरल उपाय करने की परंपरा है। हालांकि पितृ दोष दूर होने जैसी बातें धार्मिक मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं।
पीपल के पेड़ से जुड़ा उपाय
मान्यता के अनुसार इंदिरा एकादशी के दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पीपल के पेड़ के पास जाकर जल अर्पित करें। जल में काले तिल मिलाने की परंपरा भी बताई गई है। पीपल की जड़ में जल चढ़ाते समय पितरों का स्मरण किया जाता है। इसके बाद पीपल के पेड़ की परिक्रमा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा के साथ परिक्रमा करने और पितरों को याद करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है।
क्यों खास मानी जाती है इंदिरा एकादशी?
इंदिरा एकादशी पितृ पक्ष में पड़ती है। इसी वजह से इसका संबंध पितरों से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ मिलता है। पितरों के लिए तर्पण, दान और श्राद्ध कर्म करने की भी परंपरा है। धार्मिक ग्रंथों में इंदिरा एकादशी के व्रत को पितरों के कल्याण से जोड़कर देखा गया है। इसी कारण पितृ पक्ष के दौरान आने वाली इस एकादशी को कई परिवार विशेष श्रद्धा के साथ मनाते हैं।
पीपल की पूजा में रखें इन बातों का ध्यान
पीपल की पूजा करते समय स्वच्छता और श्रद्धा का ध्यान रखने की परंपरा है। पेड़ को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। पूजा के दौरान दीपक जलाने की स्थिति में आग से सुरक्षा का भी ध्यान रखना जरूरी है।
यदि किसी व्यक्ति के परिवार में पितृ कर्म की कोई विशेष परंपरा है तो उसे उसी के अनुसार पूजा और तर्पण करना चाहिए। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि अलग हो सकती है।
दान का भी बताया गया है महत्व
इंदिरा एकादशी पर जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराने और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करने की धार्मिक परंपरा है। अन्न, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान किया जा सकता है। पितरों के नाम पर जरूरतमंदों की सहायता करना भी कई परिवारों में शुभ माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से इसका उद्देश्य श्रद्धा और सेवा की भावना को बढ़ावा देना है।
पितृ दोष को लेकर क्या मान्यता है?
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में पितृ दोष को पूर्वजों से जुड़े कर्मों या पारिवारिक बाधाओं से जोड़कर देखा जाता है। इसके निवारण के लिए तर्पण, श्राद्ध, दान और पूजा जैसे कई उपाय बताए जाते हैं।
हालांकि किसी उपाय से पितृ दोष निश्चित रूप से समाप्त हो जाएगा या उससे जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी, इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जाता। ऐसे उपाय आस्था और धार्मिक परंपराओं का हिस्सा हैं। इंदिरा एकादशी पर पीपल को जल अर्पित करना, पितरों का स्मरण करना और जरूरतमंदों की सहायता करना धार्मिक रूप से श्रद्धा व्यक्त करने के तरीके माने जाते हैं। पूजा करते समय अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार विधि का पालन करना बेहतर माना जाता है।
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