धर्म-अध्यात्म

कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु को जरूर अर्पित करें तुलसी की मंजरी

Subhi
24 July 2022 2:45 AM GMT
कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु को जरूर अर्पित करें तुलसी की मंजरी
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सावन का महीना भगवान शिवजी को समर्पित होता है। इस महीने में शिवजी की पूजा-उपासना की जाती है। इसके अलावा, सावन माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को कामिका एकादशी मनाई जाती है।

सावन का महीना भगवान शिवजी को समर्पित होता है। इस महीने में शिवजी की पूजा-उपासना की जाती है। इसके अलावा, सावन माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को कामिका एकादशी मनाई जाती है। इस वर्ष 24 जुलाई को कामिका एकादशी है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विधान है। सनातन धर्म में एकादशी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि एकादशी को व्रत उपासना करने से न केवल साधक की मनोकामनाएं यथाशीघ्र पूर्ण होती है, बल्कि मरणोंउपरांत मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। इसके लिए एकादशी तिथि को भगवान श्रीहरि विष्णुजी की विधि और श्रद्धापूर्वक पूजा-आराधना की जाती है। इस व्रत के कई कठोर नियम हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है। वहीं, कामिका एकादशी को तुलसी की मंजरियों से विष्णुजी की पूजा करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है। आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-

कामिका एकादशी की तिथि

कामिका एकादशी की तिथि 23 जुलाई को दिन में 11 बजकर 27 मिनट पर शुरू होकर अगले दिन 24 जुलाई को दोपहर में 1 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगी। अतः व्रती 24 जुलाई के दिन एकादशी व्रत रख भगवान श्रीविष्णु की पूजा-आराधना कर सकते हैं। इस दिन वृद्धि योग, द्विपुष्कर योग और ध्रुव योग भी हैं। अत: साधक वृद्धि योग में भगवान की पूजा कर सकते हैं। पंचांग की मानें तो वृद्धि योग सुबह से है। साधक 25 जुलाई को पारण कर सकते हैं।

पूजा विधि

कामिका एकादशी व्रत उपवास के लिए दशमी तिथि से लहसुन, प्याज समेत तामसिक भोजन का त्याग करें। एकादशी को प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठें। अब नित्य कर्मों से निवृत होकर स्नान-ध्यान करें। इसके पश्चात, आमचन कर सर्वप्रथम व्रत संकल्प लें। अब भगवान भास्कर को तिलांजलि देकर भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा फल, फूल, पुष्प, धूप, दीप, कपूर-बाती पीले मिष्ठान आदि से करें। कामिका एकादशी को भगवान श्रीहरि विष्णु के चरणों में तुलसी की मंजरियां जरूर अर्पित करें। इससे व्यक्ति को मृत्यु उपरांत मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही साधक के सभी पाप नाश हो जाते हैं। दिन भर उपवास रखें और संध्याकाल में आरती अर्चना कर फलाहार करें। व्रती दिन में एक फल और एक बार जल ग्रहण कर सकते हैं।

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