- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- धर्म-अध्यात्म
- /
- पीरियड्स में करवा चौथ...
धर्म-अध्यात्म
पीरियड्स में करवा चौथ व्रत, जानें सरगी से पूजा तक के नियम
Rajeshwari Nishad
27 Oct 2026 3:25 PM IST

x
Karwa Chauth Vrat During Periods: हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। साल 2026 में करवा चौथ का पर्व 29 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत का संकल्प लेती हैं और शाम को करवा माता, भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करती हैं। लेकिन कई महिलाओं के मन में सवाल रहता है कि अगर करवा चौथ के दिन अचानक पीरियड यानी मासिक धर्म शुरू हो जाए तो क्या करना चाहिए? क्या ऐसी स्थिति में व्रत टूट जाता है या पूजा नहीं की जा सकती? आइए जानते हैं मासिक धर्म के दौरान करवा चौथ की पूजा से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और जरूरी सावधानियां।
करवा चौथ के दिन पीरियड आ जाए तो क्या करें?
करवा चौथ की तैयारियों के बीच अचानक मासिक धर्म शुरू होने पर कई महिलाएं धार्मिक नियमों को लेकर असमंजस में पड़ जाती हैं। कुछ घरों में मासिक धर्म के दौरान पूजा स्थल पर जाने और पूजा सामग्री छूने से परहेज करने की परंपरा है।
हालांकि, सभी हिंदू परिवारों और समुदायों में एक जैसे नियम नहीं हैं। कई धार्मिक जानकारों के अनुसार, मासिक धर्म शुरू होने मात्र से व्रत अपने आप खंडित नहीं माना जाता। महिला अपनी श्रद्धा, पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत जारी रखने या उसमें बदलाव करने का निर्णय ले सकती है।
पीरियड के दौरान करवा माता की पूजा कैसे करें?
जिन परिवारों में मासिक धर्म के दौरान प्रत्यक्ष पूजा नहीं करने की परंपरा है, वहां महिलाएं मानसिक पूजा का विकल्प अपना सकती हैं।धार्मिक मान्यता के अनुसार, महिला अपने स्थान पर बैठकर करवा माता का ध्यान कर सकती है और पति के अच्छे स्वास्थ्य तथा सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना कर सकती है।यदि घर में कोई अन्य सुहागिन महिला मौजूद है तो उससे पूजा संपन्न कराने का विकल्प भी अपनाया जाता है। कुछ परिवारों में पति भी पूजा की सामग्री अर्पित करने में सहयोग करते हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इन परंपराओं का पालन परिवार और व्यक्तिगत आस्था के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। मासिक धर्म को धार्मिक अशुभता या महिला की गलती मानने का कोई चिकित्सकीय आधार नहीं है।
क्या दूसरी महिला कर सकती है करवा चौथ की पूजा?
कुछ पारंपरिक मान्यताओं में मासिक धर्म के दौरान महिला के स्थान पर दूसरी सुहागिन महिला से पूजा कराने का सुझाव दिया जाता है।ऐसी स्थिति में परिवार की अन्य महिला पूजा की थाली तैयार कर सकती है, दीपक जला सकती है और करवा माता की कथा पढ़ सकती है।व्रत रखने वाली महिला वहीं बैठकर या अपनी सुविधा के अनुसार दूर से कथा सुन सकती है। वह मन ही मन भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण भी कर सकती है।धार्मिक परंपराओं में इस व्यवस्था को श्रद्धा बनाए रखने का एक विकल्प माना जाता है। हालांकि, इससे पूजा का निश्चित फल मिलने का दावा आस्था का विषय है, प्रमाणित तथ्य नहीं।
क्या मासिक धर्म में करवा चौथ की कथा सुन सकते हैं?
करवा चौथ के दिन व्रत कथा सुनने की विशेष परंपरा है। कथा में करवा माता की महिमा और व्रत के महत्व का वर्णन किया जाता है।मासिक धर्म के दौरान भी महिलाएं कथा सुन सकती हैं। कुछ परिवारों में इस समय धार्मिक पुस्तक और पूजा सामग्री को न छूने की परंपरा होती है। ऐसे में महिलाएं किसी अन्य सदस्य से कथा सुन सकती हैं या मोबाइल पर कथा का पाठ सुन सकती हैं।इसके अतिरिक्त माता पार्वती और भगवान शिव का मानसिक स्मरण भी किया जा सकता है।
पीरियड में चंद्रमा को अर्घ्य दे सकते हैं या नहीं?
करवा चौथ के व्रत में चंद्र दर्शन का महत्वपूर्ण स्थान है। परंपरा के अनुसार, महिलाएं चंद्रमा निकलने के बाद अर्घ्य देती हैं और छलनी से चंद्रमा तथा अपने पति का दर्शन करती हैं।मासिक धर्म के दौरान इस विधि को लेकर भी अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ परिवारों में महिलाएं स्वयं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं, जबकि अन्य परिवारों में पति या परिवार का दूसरा सदस्य यह प्रक्रिया पूरी करता है।इसलिए इस विषय पर कोई एक नियम सभी महिलाओं पर लागू नहीं होता। महिलाएं अपनी आस्था और सुविधा के अनुसार चंद्र दर्शन की परंपरा निभा सकती हैं।
क्या पीरियड आने से करवा चौथ का व्रत खंडित हो जाता है?
धार्मिक जानकारों के अनुसार, मासिक धर्म आना प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है। केवल इसके शुरू होने से व्रत खंडित हो जाने की सार्वभौमिक मान्यता नहीं है।कई परंपराओं में महिलाओं को इस दौरान व्रत जारी रखने की अनुमति दी जाती है। वहीं कुछ परिवारों में स्वास्थ्य और आराम को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है।इसलिए महिलाओं को इस बात से परेशान नहीं होना चाहिए कि मासिक धर्म आने के कारण उनकी पूजा या श्रद्धा का महत्व कम हो जाएगा।
पीरियड में निर्जला व्रत रखना कितना सुरक्षित?
मासिक धर्म के दौरान कुछ महिलाओं को पेट में दर्द, ऐंठन, सिरदर्द, थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। ऐसे में बिना पानी पिए लंबे समय तक उपवास करने से डिहाइड्रेशन, चक्कर और असहजता का खतरा बढ़ सकता है।
यदि मासिक धर्म के दौरान बहुत ज्यादा रक्तस्राव हो रहा हो, पहले से खून की कमी हो या कमजोरी महसूस हो रही हो, तो निर्जला व्रत से बचना बेहतर है।जरूरत पड़ने पर पानी पीना, फलाहार करना या व्रत समाप्त करना स्वास्थ्य की दृष्टि से उचित हो सकता है। धार्मिक आस्था के लिए अपनी सेहत को खतरे में डालना जरूरी नहीं है।
करवा चौथ पर महिलाओं को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
करवा चौथ के दिन मासिक धर्म आने पर महिलाओं को स्वच्छता, पर्याप्त आराम और अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि वे व्रत रख रही हैं तो शरीर में होने वाले बदलावों और कमजोरी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।परिवार के सदस्यों को भी महिलाओं पर कठोर उपवास या किसी विशेष पूजा पद्धति का दबाव नहीं डालना चाहिए।
Next Story





