धर्म-अध्यात्म

हर किसी को नहीं मिलता बुलावा! छतरपुर के प्राचीन हनुमान मंदिर में पूरी होती हैं मनोकामनाएँ

nidhi
12 May 2026 2:53 PM IST
हर किसी को नहीं मिलता बुलावा! छतरपुर के प्राचीन हनुमान मंदिर में पूरी होती हैं मनोकामनाएँ
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छतरपुर का 1,000 साल पुराना हनुमान मंदिर
छतरपुर जिले से लगभग 50 किमी दूर नौगांव जनपद के सिंहपुर गांव में उर्मिल नदी किनारे एक ऐसी भी हनुमान जी की प्राचीन मूर्ति है, जिसे 1 हजार साल पुराना बताया जाता है. मान्यता है कि यहां पहले गांव बसा था, यहीं पर बीरानखेरा बस्ती हुआ करती थी. उस समय भी हनुमान जी की मूर्ति थी. हालांकि, सैकड़ों साल पहले बस्ती उजड़ गई लेकिन मूर्ति आज भी जस की तस स्थापित है. साल 1984 में तत्कालीन छतरपुर कलेक्टर होशियार सिंह भी हनुमान जी के बाल रुप के दर्शन करने मंगलवार और शनिवार को छतरपुर से यहां आते थे. मान्यता है कि यहां सभी की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
पुजारी सुरेशदास लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि यह हनुमान जी की मूर्ति प्राचीन है. मेरी उम्र 56 साल हो गई है. मेरे गुरुजी शिवलोचन दास साल 1993 में यहां आए थे. यह मंदिर परिसर चित्रकूट निर्मोही अखाड़ा अखाड़ा की संस्था है. जब गुरुजी आऊ थे तो हनुमान जी की छोटी सी मड़िया ही बनी थी.इसके बाद गुरुजी ने इस मंदिर का विस्तार कार्य किया. वह बताया करते थे कि हनुमान जी की मूर्ति 1 हजार साल पुरानी है. जिले भर में ऐसी मूर्ति नहीं है. पुराने बुजुर्ग भी यही बताते हैं.
बालरूप में विराजे हनुमान
बताते हैं कि यहां पर जो प्राचीन हनुमान मूर्ति है वह बालक रुप में हैं. दक्षिणी मुखी बाल हनुमान जी की ये सिद्ध मूर्ति है. हर कोई इस मूर्ति को देखते ही रह जाता है. प्राचीन से इसी स्थान पर विराजे हैं. पुजारी सुरेशदास बताते हैं एक सयय यहां गांव हुआ करता था. वीरानखेरा बस्ती हुआ करती थी. इसी बस्ती पर सैकड़ों साल पुरानी हनुमान मूर्ति भी रखी. हालांकि, बस्ती तो वीरान हो गई लेकिन हनुमान जी की चमत्कारिक मूर्ति आज भी विराजमान है.
कलेक्टर भी लगाते पेशी
पुजारी बताते हैं कि साल 1984 में छतरपुर कलेक्टर होशियार सिंह थे. वह यहां आया करते थे. वह हनुमान भक्त थे. छतरपुर से 50 किमी दूर सिंहपुर गांव आया करते थे. मंगलवार और शनिवार को तो हनुमान जी के दर्शन करने आते ही थे. उस समय हनुमान मूर्ति के लिए छोटा सा मंदिर ही था. हालांकि, बाद में मंदिर का निर्माण कार्य किया गया.
मनोकामना होती पूरी
पुजारी बताते हैं कि हनुमान जी की ये मूर्ति बहुत चमत्कारिक है. यहां जो भी श्रद्धालु सच्चे भाव से मनोकामना मांगते हैं उनका काम सफल ही होता है. यहां से कोई भी श्रद्धालु निराश होकर नहीं जाता है. यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. मकर संक्रांति के दिन गांव में मेला भी लगता है,उस समय हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं.
प्रसिद्ध चरण पादुका सिंहपुर में बना हनुमान मंदिर
बताते हैं कि छतरपुर के चरण पादुका सिंहपुर में उर्मिल नदी के किनारे मप्र का जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ था. आज यहां जलियांवाला बाग के नाम से पार्क भी बना है. पार्क के बगल से ही नदी किनारे हनुमान जी का प्राचीन स्थान बना है.
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