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निर्जला एकादशी का महत्व
निर्जला एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक हिंदू त्योहार है। यह शुभ दिन हिंदू कैलेंडर के सबसे खास दिनों में से एक है। भक्त इस दिन व्रत रखने और भगवान का आशीर्वाद पाने का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। यह एकादशी हिंदू महीने ज्येष्ठ के शुक्ल पक्ष की 11वीं तिथि को मनाई जाती है। निर्जला एकादशी राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों में मनाई जाती है।
विठुमाऊली तू माऊली जगाची,माऊलीत मूर्ति विठ्ठलाची,विठ्ठला.. मायबापा..!काय तुझी माया सांगू श्रीरंगा,संसाराची पंढरी तू केली पांडूरगा,विठ्ठला.. मायबापा..!निज ज्येष्ठ शु.११ गुरुवार,दि.२५ जून२०२६ #निर्जला_एकादशी निमित्त सर्व #विठ्ठल भक्तांना हादीॅक शुभेच्छा..!#NirjalaEkadashi pic.twitter.com/vSS6nuVwJT
— Sanjay Chavan - संजय कांतीलाल चव्हाण (@ExmlaSanjay) June 25, 2026
निर्जला एकादशी 2026: तारीख और समय
द्रिक पंचांग के अनुसार, यह दिन 26 जून 2026 को मनाया जाएगा।
एकादशी तिथि शुरू - 24 जून 2026 को रात 09:42 बजे
एकादशी तिथि समाप्त - 25 जून 2026 को रात 11:39 बजे
निर्जला एकादशी का महत्व
साल भर में मनाई जाने वाली सभी 24 एकादशियों में से निर्जला एकादशी को सबसे शक्तिशाली माना जाता है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, सच्चे मन से यह व्रत रखने पर भक्तों को सभी एकादशियों का व्रत रखने के बराबर आध्यात्मिक लाभ मिलता है।
यह व्रत महाभारत के पांडव भाइयों में से एक, भीम से जुड़ा है। अपने भाइयों की तरह महीने में दो बार व्रत न रख पाने के कारण, भीम ने ऋषि व्यास से मार्गदर्शन मांगा, जिन्होंने उन्हें निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। तब से इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
निर्जला एकादशी की पूजा विधि
इस शुभ दिन पर भक्तों को सुबह जल्दी उठकर सूर्योदय से पहले स्नान करना चाहिए। गंगाजल से घर को साफ करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें। आशीर्वाद पाने के लिए इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के मंदिर जाना सबसे अच्छा होता है। लेकिन अगर आप मंदिर नहीं जा सकते हैं, तो आप घर पर ही भगवान की पूजा कर सकते हैं।
एक आसन तैयार करें और उस पर पीला कपड़ा बिछाएं। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की मूर्तियां स्थापित करें। फूल, पंचामृत, भोग (खीर, फल और सूखे मेवे) चढ़ाएं और विष्णु सहस्रनाम, विष्णु स्तोत्र, गीता का पाठ करें और अंत में भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की आरती करें।
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