धर्म-अध्यात्म

Nirjala Ekadashi 2023: निर्जला एकादशी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा

Rounak Dey
27 May 2023 12:20 AM IST
Nirjala Ekadashi 2023: निर्जला एकादशी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा
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पुण्य फल की होगी प्राप्ति

Nirjala Ekadashi Vrat Katha: इस साल 31 मई 2023 को निर्जला एकादशी है। शास्त्रों में निर्जला एकादशी के व्रत को सबसे कठिन और पुण्य फलदायी बताया गया है। इस व्रत मे जल का त्याग करना पड़ता है।

Nirjala Ekadashi Vrat Katha: इस साल 31 मई 2023 को निर्जला एकादशी है। शास्त्रों में निर्जला एकादशी के व्रत को सबसे कठिन और पुण्य फलदायी बताया गया है। इस व्रत में जल का त्याग करना पड़ता है। इस दिन बिना कुछ खाए पिए व्रत रखने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। मान्यता है कि मात्र इस एकादशी को कर लेने से साल भर की एकादशियों के बराबर फल प्राप्त हो जाता है। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखकर पूजा करने और निर्जला एकादशी व्रत की कथा पढ़ने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। निर्जला एकादशी व्रत कथा इस प्रकार है-

पद्मपुराण में निर्जला एकादशी के महत्व का वर्णन करते हुए बताया गया है कि भगवान श्री कृष्ण जब पांडवों को एकादशी व्रत का महत्व बता रहे थे, उस समय जब युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से कहा कि हे जनार्दन आप ज्येष्ठ मास की एकादशी का जो फल और विधान है वह बताइए। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का वर्णन तुमने सुन लिया है अब ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का कैसा प्रभाव है वह शास्त्र और धर्मों के ज्ञाता वेद व्यास जी से सुनो।

वेदव्यास जी ने कहा कि हे कुंती नंदन, ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा गया है। इस दिन आचमन और दंतधावन यानी दांत साफ करने के अलावा अन्य कार्यों के लिए मुंह में जल नहीं लेना चाहिए। इससे यह व्रत भंग हो जाता है। इस दिन सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।

व्यास जी की बातों को सुनकर भीमसेन बोल उठे, हे महाबुद्धिमान पितामह मेरे सभी भाई द्रौपदी सहित एकादशी का व्रत करते हैं। लेकिन मेरे पेट में वृक नामक अग्नि हमेशा जलती रहती है जिससे मैं भूखा नहीं रह सकता है। जब तक मैं जी भरकर भोजन ना कर लूं यह अग्नि शांत नहीं होती। इस पर व्यास जी ने कहा कि अगर तुम्हें स्वर्ग की अभिलाषा है तो तुम्हें एकादशी का व्रत करना ही चाहिए। भीम के ऐसे कहने पर व्यास जी ने कहा कि फिर तुम पूरे साल की एकादशी का फल देने वाली निर्जला एकादशी का व्रत जरूर करो।

व्यास जी ने कहा कि भगवान विष्णु ने कहा है जो व्यक्ति निर्जला एकादशी व्रत का नियम पूर्वक पालन करता है वह करोड़ों स्वर्ण मुद्रा दान करने का पुण्य प्राप्त कर लेता है। इस एकादशी के दिन किए गए जप, तप, दान का पुण्य अक्षय होता है। यानी वह अनेक जन्मों तक लाभ देता है। जो व्यक्ति इस एकादशी का व्रत करते हैं उनके सामने मृत्यु के सामने यम के दूत नहीं आते बल्कि भगवान विष्णु के दूत जो पीतांबर धारण किए होते हैं। वह विमान में बैठाकर अपने साथ ले जाते हैं। पद्म पुराण में कहा गया है कि निर्जला एकादशी व्रत की कथा को कहने और सुनने से भी ग्रहण के दौरान किए गए दान के बराबर पुण्य प्राप्त हो जाता है।

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